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मेरी तनहाई चुराने आई!
दर ओ दीवार पे शकलें सी बनाने आई,फिर ये बारिश मेरी तनहाई चुराने आई| ‘कैफ़’ भोपाली
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मेरे साजन हैं उस पार!
फिल्म- ‘बंदिनी’ के लिए शैलेन्द्र जी का लिखा एक प्रसिद्ध गीत आज शेयर कर रहा हूँ जिसे नूतन जी और अशोक कुमार जी पर फिल्माया गया था| शैलेन्द्र जी के लिखे इस भाव भरे गीत के लिए संगीत और स्वयं अपना स्वर दिया था स्वर्गीय सचिन देव बर्मन जी ने| बर्मन दा के स्वर में…
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ये दयार-ए-इश्क़ है!
ये दयार-ए-इश्क़ है इसमें सहर,बस्तियाँ कम कम हैं वीराने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’
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देने हैं नज़राने बहुत!
ये जिगर, ये दिल, ये नींदें, ये क़रार,इश्क़ में देने हैं नज़राने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’
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बनते हैं अंजाने बहुत!
क्या तग़ाफ़ुल का अजब अन्दाज़ है,जानकर बनते हैं अंजाने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’
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मुझको समझाने बहुत!
आ रहे हैं मुझको समझाने बहुत,अक़्ल वाले कम हैं, दीवाने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’
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मज़ा चखा के ही माना हूँ!
मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को, समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी