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अब दो आलम में, उजाले ही उजाले होंगे!
आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- अभिव्यक्ति, कविता, शेर-ओ-शायरी, ये सब ऐसे काम नहीं है कि जब चाहा लिख लिया और उसमें गुणवत्ता भी बनी रहे। दो शेर याद आ रहे हैं इस संदर्भ में- हम पे दुखों के पर्बत टूटे, तब हमने दो-चार कहे, उसपे भला…
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Come I may, but go I must!
There is a question, if I have to describe me in just one word, which word could best describe me. Let me try. I have always loved a poem by Gerald Gould- ‘Wander Thirst’. Since my schooling days I loved this poem, since I read it for the first time. This poem describes my wander…
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बड़ी भूल हुई अरे हमने, ये क्या समझा, ये क्या जाना!
आज मोहम्मद रफी साहब का गाया एक बेहद खूबसूरत गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत 1967 मे रिलीज़ हुई फिल्म- ‘पत्थर के सनम’ के लिए मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने लिखा था और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी के संगीत निर्देशन में रफी साहब ने बेहद खूबसूरती और फीलिंग्स की साथ गाया है| लीजिए प्रस्तुत…
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नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है!
आज एक बार फिर से स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक गजल प्रस्तुत कर रहा हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि थे और आपात्काल मेन लिखे गए उनके गजल संग्रह – ‘साये में धूप’ के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हुए थे| आपात्काल के उस दमनकारी माहौल में इस प्रकार की गज़लें…
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सहानुभूति- रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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तुम अरुणारे चरण धरो तो – भारत भूषण
आज एक बार फिर से अपने एक प्रिय कवि/ गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मैंने पहले भी भारत भूषण जी के अनेक गीत शेयर रहे हैं और वे बहुत ही निराले सर्जक रहे हैं| एक खास बात कि भारत भूषण जी अभिव्यक्ति के हर क्षेत्र मेन पवित्रता का…
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A small thing- love for our country!
Talking about small things in life, which hold great importance! What is small or big depends on the thinking of a person and others may consider it small or big based on their thinking or may be values. We often try to do things in life which are proper as per our principals,…
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प्रतीक्षा – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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कोरोना के असहाय शिकार!
आज कोरोना के खतरे के बाद देश में बनी परिस्थितियों की चर्चा कर रहा हूँ| कितनी भयंकर विपदा यह संपूर्ण मानव जाति पर आई है, ये आप सभी जानते हैं| चीन से शुरू होकर कोरोना के इस दैत्य ने इटली, अमरीका आदि में जैसी तबाही मचाई है, शुक्र है हम अभी वैसी स्थिति में नहीं…