-
तू मुझे मेरे ही साये से डराता क्या है!
आज प्रस्तुत कर रहा हूँ ज़नाब शहजाद अहमद जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल, इस गजल के कुछ शेर गुलाम अली साहब ने भी गाए हैं| लीजिए प्रस्तुत है यह सुंदर ग़ज़ल – अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है,एक नज़र मेरी तरफ भी, तेरा जाता क्या है| मेरी रुसवाई में तू भी है बराबर…
-
किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा !
हिन्दी काव्य मंचों की शान रहे स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी की एक हिन्दी ग़ज़ल आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| कविता अपनी बात स्वयं कहती है और नीरज जी भी किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं| लीजिए प्रस्तुत है यह ग़ज़ल और नीरज जी के शब्दों में कहें तो ‘गीतिका’- बदन पे जिस के शराफ़त…
-
न मैं होता तो क्या होता!
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है ये पोस्ट- एक पुराने संदर्भ से प्रेरणा लेते हुए आज का आलेख लिख रहा हूँ। लेकिन मैं उन प्रसंगों का ही उल्लेख कर रहा हूँ जिनसे मेरे जीवन, मेरे करियर को सकारात्मक दिशा मिली है। ऐसे प्रसंग नहीं हैं जिनके बारे में मैं…
-
दृष्टि-अंधता का विस्तार!
आज ऐसे ही अचानक बात करने का बहाना मिल गया| क्रिकेट में बॉलर के लिए एक विशेष कुशलता मानी जाती है कि वह ऐसे कोण पर बॉल डाले, या ऐसा घुमाव दे कि खिलाड़ी उसको न देख पाए| मुझे याद है कि किसी समय भागवत चन्द्रशेखर भारतीय टीम के ऐसे बॉलर थे जिनकी बॉल बहुत…
-
नरकासुर वध!
हमारा देश त्यौहारों का देश है| हर समय, कहीं न कहीं कोई त्यौहार मनाया जा रहा होता है| दशहरा और दीपावली हमारे प्रमुखतम त्यौहारों में शामिल हैं| दशहरे के अवसर पर जहां उत्तर भारत में रामलीला होती है, वहीं पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की धूम होती है| बहुत से लोग नौ दिन तक उपवास…
-
लीडर याने जांबवंत!
दीपावली आ रही है, श्रीराम जी के लंका पर विजय के बाद, और वनवास की अवधि पूरी होने पर अयोध्या लौटने पर खुशी का पर्व, जिसमें अमावस्या की काली रात को दीयों और रोशनी से जगमग कर दिया जाता है| मुझे अचानक याद आया कि लंका विजय से पहले किसी दूत को वहाँ जाना था,…
-
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की!
हिन्दुस्तानी उर्दू शायरी के एक प्रसिद्ध हस्ताक्षर हैं- ज़नाब बशीर बद्र जी| वे शायरी में एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाने जाते हैं| मुशायरों को लूटने वाले बशीर जी की गज़लें अक्सर लोग गुनगुनाते हैं| उनका यह शेर –‘उजाले अपनी यादों के हमारे पास रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए’,…
-
मैं प्यार का परवाना!
आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| मजे की बात ये है कि यह गीत भी 1968 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘दीवाना’ से ही है- यह गीत लिखा है हसरत जयपुरी जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया है- शंकर जयकिशन की…