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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Nov 2020

    तू मुझे मेरे ही साये से डराता क्या है!

    आज प्रस्तुत कर रहा हूँ ज़नाब शहजाद अहमद जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल, इस गजल के कुछ शेर गुलाम अली साहब ने भी गाए हैं| लीजिए प्रस्तुत है यह सुंदर ग़ज़ल – अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है,एक नज़र मेरी तरफ भी, तेरा जाता क्या है| मेरी रुसवाई में तू भी है बराबर…

  • 19th Nov 2020

    किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा !

    हिन्दी काव्य मंचों की शान रहे स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी की एक हिन्दी ग़ज़ल आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| कविता अपनी बात स्वयं कहती है और नीरज जी भी किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं| लीजिए प्रस्तुत है यह ग़ज़ल और नीरज जी के शब्दों में कहें तो ‘गीतिका’- बदन पे जिस के शराफ़त…

  • 18th Nov 2020

    न मैं होता तो क्या होता!

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है ये पोस्ट- एक पुराने संदर्भ से प्रेरणा लेते हुए आज का आलेख लिख रहा हूँ। लेकिन मैं उन प्रसंगों का ही उल्लेख कर रहा हूँ जिनसे मेरे जीवन, मेरे करियर को सकारात्मक दिशा मिली है। ऐसे प्रसंग नहीं हैं जिनके बारे में मैं…

  • 16th Nov 2020

    दृष्टि-अंधता का विस्तार!

    आज ऐसे ही अचानक बात करने का बहाना मिल गया| क्रिकेट में बॉलर के लिए एक विशेष कुशलता मानी जाती है कि वह ऐसे कोण पर बॉल डाले, या ऐसा घुमाव दे कि खिलाड़ी उसको न देख पाए| मुझे याद है कि किसी समय भागवत चन्द्रशेखर भारतीय टीम के ऐसे बॉलर थे जिनकी बॉल बहुत…

  • 15th Nov 2020

    नरकासुर वध!

    हमारा देश त्यौहारों का देश है| हर समय, कहीं न कहीं कोई त्यौहार मनाया जा रहा होता है| दशहरा और दीपावली हमारे प्रमुखतम त्यौहारों में शामिल हैं| दशहरे के अवसर पर जहां उत्तर भारत में रामलीला होती है, वहीं पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की धूम होती है| बहुत से लोग नौ दिन तक उपवास…

  • 14th Nov 2020

    The Anti social, social media!

    Once again talking about social media. I have talked on this subject a number of times and I am making a very good use of these platforms as a blogger. I normally try to talk on literary subjects- poetry, film songs etc. which are non-controversial, and I normally avoid falling into arguments with people, who…

  • 13th Nov 2020

    लीडर याने जांबवंत!

    दीपावली आ रही है, श्रीराम जी के लंका पर विजय के बाद, और वनवास की अवधि पूरी होने पर अयोध्या लौटने पर खुशी का पर्व, जिसमें अमावस्या की काली रात को दीयों और रोशनी से जगमग कर दिया जाता है| मुझे अचानक याद आया कि लंका विजय से पहले किसी दूत को वहाँ जाना था,…

  • 12th Nov 2020

    बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की!

    हिन्दुस्तानी उर्दू शायरी के एक प्रसिद्ध हस्ताक्षर हैं- ज़नाब बशीर बद्र जी| वे शायरी में एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाने जाते हैं| मुशायरों को लूटने वाले बशीर जी की गज़लें अक्सर लोग गुनगुनाते हैं| उनका यह शेर –‘उजाले अपनी यादों के हमारे पास रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए’,…

  • 11th Nov 2020

    मैं प्यार का परवाना!

    आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| मजे की बात ये है कि यह गीत भी 1968 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘दीवाना’ से ही है- यह गीत लिखा है हसरत जयपुरी जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया है- शंकर जयकिशन की…

  • 10th Nov 2020

    अत्याचारी महाराष्ट्र सरकार!

    महाराष्ट्र में आजकल जो कुछ हो रहा है, वो निश्चित रूप से आपात्काल की याद दिलाता है| सुशांत हत्याकांड के बारे में जब प्रश्न उठाए गए, तब महाराष्ट्र सरकार जिसने पहले तुरंत ही इसे आत्महत्या घोषित कर दिया था, वो सीबीआई जांच का भरपूर विरोध करती रही| उनको सीबीआई जांच से डर क्यों लग रहा…

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