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बिजलियाँ खुद अपने गुलशन पर!
है बजा उनकी शिकायत लेकिन इसका क्या इलाज,बिजलियाँ खुद अपने गुलशन पर गिरा लेते हैं लोग| क़तील शिफ़ाई
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नज़रें भी चुरा लेते हैं लोग!
मिल भी लेते हैं गले से अपने मतलब के लिए,आ पड़े मुश्किल तो नज़रें भी चुरा लेते हैं लोग| क़तील शिफ़ाई
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कई चेहरे सजा लेते हैं लोग!
जब भी चाहें एक नई सूरत बना लेते हैं लोग,एक चेहरे पर कई चेहरे सजा लेते हैं लोग| क़तील शिफ़ाई
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जा तुझको भी नींद न आए!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के एक महान गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| भारत भूषण जी के गीत पढ़ना और उससे भी अधिक जो सौभाग्य मुझे अनेक बार मिला, उनको गीत पाठ करते हुए सुनना एक दिव्य अनुभव होता था| उनके बहुत से गीत अमर हैं,…