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फिर भी हम अकेले हैं!
आज एक गीत शेयर कर रहा हूँ जो सबा अफ़गानी जी का लिखा हुआ है और जहां तक मुझे याद था, मैंने इसे बहुत पहले अनूप जलोटा जी की आवाज में सुना था, लेकिन अब मालूम हुआ की ये टी सीरीज़ की ओर से ‘कसम तेरी कसम’ की एल्बम के लिए सोनू निगम जी की…
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सुख से डर!
हिन्दी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा का कविता लेखन का अपना अलग ही अंदाज़ था, अक्सर वे बातचीत के लहज़े में कविता लिखते थे| भारतीय ज्ञानपीठ सहित अनेक साहित्यिक और राष्ट्रीय पुरस्कारों से विभूषित भवानी दादा हिन्दी साहित्य की अमूल्य धरोहर…
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मेरी आत्मा की ये आवाज़ है!
हिन्दी फिल्मों के प्रमुख गीतकार और श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय- पंडित भरत व्यास जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| भरत व्यास जी का गीत लेखन का अपना अलग अंदाज़ था और एक बात यह कि उनकी रचनाओं में उनकी अटूट आस्था दिखाई देती है| इत्तफाक से एक बात याद आ रही है कि…
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सूराख पत्थरों में होते न उँगलियों से!
आज स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, स्वर्गीय त्यागी जी अपने अलग तेवरों के लिए जाने जाते थे| आज की इस ग़ज़ल में भी उन्होंने कविता लेखन के बारे में कुछ अच्छी बात की है, लीजिए इसका आनंद लीजिए- जा पास मौलवी के या पूछ जोगियों से।सूराख पत्थरों में होते…
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अँधेरे का सफ़र मेरे लिए है!
एक बार फिर से आज, हिन्दी कवि सम्मेलनों को अपने सुरीले गीतों से चमत्कृत करने वाले स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| अवस्थी जी की काव्य मंचों पर अपनी एक अलग पहचान थी, मुझे आशा है कि आपको यह गीत भी अलग तरह का लगेगा- तुम्हारी चाँदनी का क्या करूँ…
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इन आँखों का हर इक आँसू ,मुझे मेरी क़सम दे दो!
प्रसिद्ध शायर और फिल्मी गीतकार- जनाब मेहंदी अली खान साहब का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| उन्होंने फिल्मों को अनेक सुंदर गीत दिए हैं और 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘आपकी परछाइयाँ’ का यह गीत भी काफी लोकप्रिय हुआ था| मदन मोहन जी के संगीत निर्देशन में यह गीत लता मंगेशकर जी ने…
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जाने क्या हो गया सवेरों को!
आज फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| जीवन में बहुत तरह की परिस्थितियों, बहुत सी परीक्षाओं से गुज़रना पड़ता है, आज तो पूरी मानव-जाति को कोरोना की परीक्षा देनी पड़ी है और हमारे देश पर यह संकट इस समय कुछ अधिक ही…
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दीवार की मरम्मत!
एक बार फिर से आज एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ| आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- दीवार की मरम्मत ऐसा कुछ है, जो दीवार को…
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मोह मोह के धागे!
आज अपने एक मित्र और सहकर्मी के प्रसंग में बात करना चाहूँगा| ये मेरे साथी मेरे बॉस थे, परंतु उनसे बात करते हुए मुझे कभी यह लगा ही नहीं कि वो मेरे बॉस थे| वैसे इस तरह का अनुभव मेरा बहुत से लोगों के साथ रहा है, परंतु उन सबमें शायद ये सबसे सज्जन व्यक्ति…
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भीगी पलकें न झुका!
आज मुझे मेरे प्रिय गायक स्वर्गीय मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत याद आ रहा है | फिल्म- साथी के लिए इस गीत को लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने और इसका संगीत दिया था- नौशाद साहब ने| कुल मिलाकर इस गीत में ऐसा दिव्य वातावरण तैयार होता है, ऐसा लगता है की…