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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Apr 2022

    मगर रात नहीं होती है!

    हाल-ए-दिल पूछने वाले तेरी दुनिया में कभी,दिन तो होता है मगर रात नहीं होती है| शकील बदायूँनी

  • 28th Apr 2022

    आँख से बरसात नहीं होती है!

    छुप के रोता हूँ तेरी याद में दुनिया भर से,कब मेरी आँख से बरसात नहीं होती है| शकील बदायूँनी

  • 28th Apr 2022

    न देखा करें आईना कभी!

    आप लिल्लाह न देखा करें आईना कभी,दिल का आ जाना बड़ी बात नहीं होती है| शकील बदायूँनी

  • 28th Apr 2022

    मगर बात नहीं होती है!

    कैसे कह दूँ कि मुलाकात नहीं होती है,रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है| शकील बदायूँनी

  • 28th Apr 2022

    सलाम तक न पहुँचे!

    ये अदा-ए-बेनियाज़ी तुझे बेवफ़ा मुबारक,मगर ऐसी बेरुख़ी क्या कि सलाम तक न पहुँचे। शकील बदायूँनी

  • 28th Apr 2022

    कहीं शाम तक न पहुँचे!

    नयी सुबह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है,ये सहर भी रफ़्ता-रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे। शकील बदायूँनी

  • 28th Apr 2022

    कभी जाम तक न पहुँचे!

    मैं नज़र से पी रहा था कि ये दिल ने बददुआ दी,तेरा हाथ ज़िंदगी-भर कभी जाम तक न पहुँचे। शकील बदायूँनी

  • 28th Apr 2022

    तोहमत मेरे नाम तक न पहुँचे!

    ग़मे-आशिक़ी से कह दो रहे–आम तक न पहुँचे,मुझे ख़ौफ़ है ये तोहमत मेरे नाम तक न पहुँचे। शकील बदायूँनी

  • 28th Apr 2022

    हार न अपनी मानूँगा मैं!

    स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी, हिन्दी काव्य मंचों पर गीत परंपरा के ऐसे ओजस्वी कवि थे जिनके गीतों पर श्रोता बरबस ही झूम उठते थे| नीरज जी न केवल कवि सम्मेलनों की शान थे अपितु हिन्दी फिल्मों में भी उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान किया है| लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय गोपाल…

  • 27th Apr 2022

    इक तार कहीं से टूट गया!

    इस नग़्मा-तराज़-ए-गुलशन ने तोड़ा है कुछ ऐसा साज़-ए-दिल,इक तार कहीं से टूट गया इक तार कहीं से टूट गया| शमीम जयपुरी

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