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मगर रात नहीं होती है!
हाल-ए-दिल पूछने वाले तेरी दुनिया में कभी,दिन तो होता है मगर रात नहीं होती है| शकील बदायूँनी
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आँख से बरसात नहीं होती है!
छुप के रोता हूँ तेरी याद में दुनिया भर से,कब मेरी आँख से बरसात नहीं होती है| शकील बदायूँनी
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न देखा करें आईना कभी!
आप लिल्लाह न देखा करें आईना कभी,दिल का आ जाना बड़ी बात नहीं होती है| शकील बदायूँनी
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मगर बात नहीं होती है!
कैसे कह दूँ कि मुलाकात नहीं होती है,रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है| शकील बदायूँनी
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सलाम तक न पहुँचे!
ये अदा-ए-बेनियाज़ी तुझे बेवफ़ा मुबारक,मगर ऐसी बेरुख़ी क्या कि सलाम तक न पहुँचे। शकील बदायूँनी
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कहीं शाम तक न पहुँचे!
नयी सुबह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है,ये सहर भी रफ़्ता-रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे। शकील बदायूँनी
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कभी जाम तक न पहुँचे!
मैं नज़र से पी रहा था कि ये दिल ने बददुआ दी,तेरा हाथ ज़िंदगी-भर कभी जाम तक न पहुँचे। शकील बदायूँनी
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तोहमत मेरे नाम तक न पहुँचे!
ग़मे-आशिक़ी से कह दो रहे–आम तक न पहुँचे,मुझे ख़ौफ़ है ये तोहमत मेरे नाम तक न पहुँचे। शकील बदायूँनी
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हार न अपनी मानूँगा मैं!
स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी, हिन्दी काव्य मंचों पर गीत परंपरा के ऐसे ओजस्वी कवि थे जिनके गीतों पर श्रोता बरबस ही झूम उठते थे| नीरज जी न केवल कवि सम्मेलनों की शान थे अपितु हिन्दी फिल्मों में भी उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान किया है| लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय गोपाल…
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इक तार कहीं से टूट गया!
इस नग़्मा-तराज़-ए-गुलशन ने तोड़ा है कुछ ऐसा साज़-ए-दिल,इक तार कहीं से टूट गया इक तार कहीं से टूट गया| शमीम जयपुरी