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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st May 2022

    किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में!

    जाने किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में,दर्द मज़े लेता है जो दुहराने में| गुलज़ार

  • 1st May 2022

    पुराना खत खोला अनजाने में!

    खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में,एक पुराना खत खोला अनजाने में| गुलज़ार

  • 1st May 2022

    सुनाई पड़ते हैं|

    आज एक बार फिर मैं स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा हिन्दी के एक अनूठे कवि थे, आज की इस कविता में भवानी दादा ने अपने उन परिजनों को एक अलग अंदाज़ में याद किया है जो उनको छोड़कर जा चुके थे| लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय…

  • 30th Apr 2022

    हमीं ने शाम चुनी है!

    सहर भी, रात भी, दोपहर भी मिली लेकिन,हमीं ने शाम चुनी है, नहीं उदास नहीं| गुलज़ार

  • 30th Apr 2022

    मिली जो, ख़ूब मिली है!

    कोई अनोखी नहीं ऐसी ज़िंदगी लेकिन,मिली जो, ख़ूब मिली है, नहीं उदास नहीं| गुलज़ार

  • 30th Apr 2022

    बस एक चुप-सी लगी है!

    बस एक चुप-सी लगी है, नहीं उदास नहीं,कहीं पे साँस रुकी है, नहीं उदास नहीं| गुलज़ार

  • 30th Apr 2022

    तस्लीम लाज़मी सी है!

    कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी,एक तस्लीम लाज़मी सी है| गुलज़ार

  • 30th Apr 2022

    आदत भी आदमी सी है!

    वक़्त रहता नहीं कहीं थमकर,इसकी आदत भी आदमी सी है| गुलज़ार

  • 30th Apr 2022

    नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है!

    दफ़्न कर दो हमें कि साँस मिले,नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है| गुलज़ार

  • 30th Apr 2022

    आँख में नमी सी है!

    शाम से आँख में नमी सी है,आज फिर आपकी कमी सी है| गुलज़ार

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