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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd May 2022

    अल्फ़ाज़ में पिरोने का!

    अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी,हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का| जावेद अख़्तर

  • 2nd May 2022

    शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का!

    बहाना ढूँढते रहते हैं कोई रोने का,हमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का| जावेद अख़्तर

  • 2nd May 2022

    भीड़ में खो गये!

    ज़नाब सुदर्शन फ़ाकिर साहब का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| फ़ाकिर साहब ने बहुत सी प्यारी ग़ज़लें और शेर लिखे हैं जिनको जगजीत सिंह जी और अनेक अन्य प्रसिद्ध गायकों ने गाया है| आज के इस गीत में भी गाँव से जुड़ी यादों को बड़ी खूबसूरती से अभिव्यक्त किया गया है| लीजिए आज…

  • 1st May 2022

    दस्तक देने ये कौन आया है!

    दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है,किसकी आहट सुनता है वीराने में। गुलज़ार

  • 1st May 2022

    पगडंडी शहर तक आकर!

    बूढ़ी पगडंडी शहर तक आकर,अपने बेटे तलाश करती है| गुलज़ार

  • 1st May 2022

    टुकड़े तलाश करती है!

    एक उम्मीद बार बार आकर,अपने टुकड़े तलाश करती है| गुलज़ार

  • 1st May 2022

    पीले पत्ते तलाश करती है!

    अपने माज़ी की जुस्तुजू में बहार,पीले पत्ते तलाश करती है| गुलज़ार

  • 1st May 2022

    पुर्ज़े तलाश करती है!

    जब गुज़रती है उस गली से सबा,ख़त के पुर्ज़े तलाश करती है| गुलज़ार

  • 1st May 2022

    ग़ुंचे तलाश करती है!

    बीते रिश्ते तलाश करती है,ख़ुशबू ग़ुंचे तलाश करती है| गुलज़ार

  • 1st May 2022

    कितनी देर लगा दी आने में!

    शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं,चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में| गुलज़ार

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