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रेत पे क्या लिखते रहते हो!
आज मोहसिन नक़वी साहब की एक ग़ज़ल के कुछ शेर, शेयर कर रहा हूँ, इसके कुछ शेर ग़ुलाम अली साहब ने भी गाए हैं| ग़ज़ल में कुछ बहुत सुंदर शेर हैं और ग़ुलाम अली साहब की अदायगी तो लाजवाब है ही| लीजिए इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- इतनी मुद्दत बाद मिले हो, किन सोचों में…
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दो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी है!
संतोषानंद जी के बहाने आज की बात करना चाहूँगा| मेरे विचार में संतोषानंद जी इसका उदाहरण हैं, कि किस प्रकार साहित्य की शुद्धतावादी मनोवृत्ति वास्तव में कविता को ही नुकसान पहुंचाती है| संतोषानंद जी की आज जो स्थिति हो गई है, उसके पीछे उनके पुत्र के साथ हुआ हादसा जिम्मेदार है, मैं उसको भूलते हुए,…
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ओर छोर छप्पर का टपके!
आज वरिष्ठ कवि और बहुत अच्छे इंसान- श्री सत्यनारायण जी के बारे में कुछ बात करूंगा, जो एक श्रेष्ठ कवि हैं, पटना में रहते हैं, शत्रुघ्न सिन्हा जी के मित्र और पड़ौसी हैं और सबसे बड़ी बात कि साहित्यिक गरिमा के साथ कवि सम्मेलन का श्रेष्ठ संचालन करते हैं| पहली बार मैंने उनके संचालन में…
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अभिनंदन के शाल-दुशाले!
स्वर्गीय भाई किशन सरोज जी का स्मरण करते हुए और उनके एक गीत का सहारा लेते हुए कुछ बातें कहना चाहूँगा| यह गीत मैंने पहले भी एक से अधिक बार शेयर किया है, आज इसका सहारा लेकर कुछ बातें कहने का मन है| किशन जी से कवि सम्मेलनों के सिलसिले में कुछ बार भेंट हुई…
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जाने कौन आस-पास होता है!
गुलज़ार साहब अपनी शायरी में और फिल्मी गीतों में भी एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाने जाते हैं| एक अलग तरह का चमत्कार अक्सर उनकी शायरी और गीतों में देखा जाता है| लीजिए आज प्रस्तुत है गुलज़ार साहब का यह गीत – जब भी यह दिल उदास होता है,जाने कौन आस-पास होता है| होंठ चुपचाप बोलते…
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मटरू का आना और जाना!
मटरू का पता ही नहीं चलता कि कब वो हमारे, मतलब अपने घर में रहेगा और कब बाहर चला जाएगा| एक तरह से देखा जाए तो उसको आवारा कहा जा सकता है, कभी वो रात में अपने स्थान पर सोता है और सुबह होते ही चला जाता है, और कभी रात भर गायब रहता है…
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गीत भी कहीं न सो जाए!
आज मैं स्वर्गीय अज्ञेय जी द्वारा संपादित- काव्य संकलन- तारसप्तक में सम्मिलित प्रमुख कवि- स्वर्गीय गिरिजा कुमार माथुर जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| तारसप्तक हिन्दी कविता की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज था| लीजिए प्रस्तुत है गिरिजाकुमार माथुर जी का यह गीत – इतना मत दूर रहोगंध कहीं खो जाएआने दो…
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सदा खुश रहे तू !
आज मैं फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत 1961 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘प्यार का सागर’ के लिए मुकेश जी ने रवि जी के संगीत निर्देशन में गाया था,इस गीत के रचनाकार थे प्रेम धवन जी| लीजिए प्रस्तुत है यह गीत, जो इतना…
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याद केवल आदेश!
आज फिर से मैं अपने बहुत प्रिय गीतकार स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मेरा सौभाग्य है कि मुझे अनेक बार उनका स्नेह और सानिध्य प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ था| आज के गीत में उन्होंने बताया है कि जब व्यक्ति दफ्तर के रूटीन के हवाले हो जाता है,…