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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Jul 2021

    रेत पे क्या लिखते रहते हो!

    आज मोहसिन नक़वी साहब की एक ग़ज़ल के कुछ शेर, शेयर कर रहा हूँ, इसके कुछ शेर ग़ुलाम अली साहब ने भी गाए हैं| ग़ज़ल में कुछ बहुत सुंदर शेर हैं और ग़ुलाम अली साहब की अदायगी तो लाजवाब है ही| लीजिए इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- इतनी मुद्दत बाद मिले हो, किन सोचों में…

  • 2nd Jul 2021

    दो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी है!

    संतोषानंद जी के बहाने आज की बात करना चाहूँगा| मेरे विचार में संतोषानंद जी इसका उदाहरण हैं, कि किस प्रकार साहित्य की शुद्धतावादी मनोवृत्ति वास्तव में कविता को ही नुकसान पहुंचाती है| संतोषानंद जी की आज जो स्थिति हो गई है, उसके पीछे उनके पुत्र के साथ हुआ हादसा जिम्मेदार है, मैं उसको भूलते हुए,…

  • 1st Jul 2021

    ओर छोर छप्पर का टपके!

    आज वरिष्ठ कवि और बहुत अच्छे इंसान- श्री सत्यनारायण जी के बारे में कुछ बात करूंगा, जो एक श्रेष्ठ कवि हैं, पटना में रहते हैं, शत्रुघ्न सिन्हा जी के मित्र और पड़ौसी हैं और सबसे बड़ी बात कि साहित्यिक गरिमा के साथ कवि सम्मेलन का श्रेष्ठ संचालन करते हैं| पहली बार मैंने उनके संचालन में…

  • 30th Jun 2021

    अभिनंदन के शाल-दुशाले!

    स्वर्गीय भाई किशन सरोज जी का स्मरण करते हुए और उनके एक गीत का सहारा लेते हुए कुछ बातें कहना चाहूँगा| यह गीत मैंने पहले भी एक से अधिक बार शेयर किया है, आज इसका सहारा लेकर कुछ बातें कहने का मन है| किशन जी से कवि सम्मेलनों के सिलसिले में कुछ बार भेंट हुई…

  • 29th Jun 2021

    एक मुट्ठी धान में!

    आज मैं प्रसिद्ध कवि और पूर्व सांसद- श्री उदय प्रताप सिंह जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| माननीय उदय प्रताप जन प्रतिनिधि हैं और सामान्य जन की चिंताओं से उनका सीधा सरोकार भी है| श्री उदय प्रताप सिंह जी संसदीय राजभाषा समिति के सदस्य के रूप में मेरे पूर्व संस्थान – एनटीपीसी में…

  • 28th Jun 2021

    जाने कौन आस-पास होता है!

    गुलज़ार साहब अपनी शायरी में और फिल्मी गीतों में भी एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाने जाते हैं| एक अलग तरह का चमत्कार अक्सर उनकी शायरी और गीतों में देखा जाता है| लीजिए आज प्रस्तुत है गुलज़ार साहब का यह गीत – जब भी यह दिल उदास होता है,जाने कौन आस-पास होता है| होंठ चुपचाप बोलते…

  • 27th Jun 2021

    मटरू का आना और जाना!

    मटरू का पता ही नहीं चलता कि कब वो हमारे, मतलब अपने घर में रहेगा और कब बाहर चला जाएगा| एक तरह से देखा जाए तो उसको आवारा कहा जा सकता है, कभी वो रात में अपने स्थान पर सोता है और सुबह होते ही चला जाता है, और कभी रात भर गायब रहता है…

  • 26th Jun 2021

    गीत भी कहीं न सो जाए!

    आज मैं स्वर्गीय अज्ञेय जी द्वारा संपादित- काव्य संकलन- तारसप्तक में सम्मिलित प्रमुख कवि- स्वर्गीय गिरिजा कुमार माथुर जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| तारसप्तक हिन्दी कविता की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज था| लीजिए प्रस्तुत है गिरिजाकुमार माथुर जी का यह गीत – इतना मत दूर रहोगंध कहीं खो जाएआने दो…

  • 25th Jun 2021

    सदा खुश रहे तू !

    आज मैं फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत 1961 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘प्यार का सागर’ के लिए मुकेश जी ने रवि जी के संगीत निर्देशन में गाया था,इस गीत के रचनाकार थे प्रेम धवन जी| लीजिए प्रस्तुत है यह गीत, जो इतना…

  • 24th Jun 2021

    याद केवल आदेश!

    आज फिर से मैं अपने बहुत प्रिय गीतकार स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मेरा सौभाग्य है कि मुझे अनेक बार उनका स्नेह और सानिध्य प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ था| आज के गीत में उन्होंने बताया है कि जब व्यक्ति दफ्तर के रूटीन के हवाले हो जाता है,…

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