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ओ जाने वाले हो सके तो!
कल हमारे प्रिय गायक, महान कलाकार और इंसान मुकेश चंद्र माथुर जी का जन्म दिन है| जिन्हें हम प्रेम से सिर्फ ‘मुकेश’ नाम से पुकारते हैं| उनकी स्मृति में प्रस्तुत आज का यह गीत फिल्म- ‘बंदिनी’ से है, जिसे लिखा था शैलेन्द्र जी ने और इसका संगीत दिया था सचिन देव बर्मन जी ने| मुकेश…
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खामोशी पहचाने कौन!
एक बार फिर से आज मैं अपने अत्यंत प्रिय शायरों में से एक, स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह की सुरीली जोड़ी ने बहुत खूबसूरत अंदाज में गाया है| निदा फ़ाज़ली साहब ने कुछ बेमिसाल गीत, ग़ज़लें और दोहे लिखे हैं और यह भी उनमें…
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जनकवि शैलेन्द्र
फिल्मी दुनिया के जनकवि स्वर्गीय शैलेन्द्र जी की मृत्यु होने पर जनकवि बाबा नागार्जुन जी द्वारा उनके प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप लिखी गई एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| इस कविता से मालूम होता कि बाबा नागार्जुन के मन में, फिल्मी दुनिया में सक्रिय अपने इस सृजनशील साथी के प्रति कितना स्नेह, लगाव और आदर…
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वही थोड़ा सा आदमी!
अशोक वाजपेयी जी आधुनिक कवियों की जमात में अग्रिम पंक्ति में नज़र आते हैं| उन्होंने मध्य प्रदेश में और केंद्र में भी सांस्कृतिक उत्थान से जुड़े अनेक पदों को सुशोभित किया| मध्य प्रदेश का ‘भारत भवन’ उनका सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन हेतु बहुत बड़ा कदम था| लीजिए आज प्रस्तुत है, अशोक वाजपेयी जी की यह…
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बस प्यार ही प्यार पले !
आज किशोर कुमार जी द्वारा स्वयं निर्मित फिल्म – ‘दूर गगन की छाँव में’ के लिए उनके ही द्वारा गाया गया एक गीत शेयर कर रहा हूँ, इस गीत का संगीत भी किशोर कुमार जी ने ही दिया है और इसमें उनके पुत्र अमित कुमार की भी आवाज है| कुल मिलाकर ये एक बहुत सुंदर…
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ज्यों कीं त्यों धर दीनी चदरिया!
आज मन हो रहा कि संत कबीर दास जी को याद कर लें| कवि-कलाकार आदि आज की ज़िंदगी का चित्रण अपने हिसाब से करते रहते हैं और हम उनकी प्रस्तुति को देखते/पढ़ते रहते हैं| आज देखते हैं कि संत कबीर दास जी के इस बारे में क्या विचार हैं| वैसे इस भजन की पंक्तियों का…
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तुम हो जाओ अविचल!
आज मैं पुनः अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा हूँ| आज मैं विख्यात कवि, नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने…
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ऑनलाइन इंटरव्यू!
अपनी पुरानी और कुछ नई कविताएं शेयर करने का सिलसिला फिलहाल बंद करता हूँ, आज इस क्रम की अंतिम कविता के साथ| फिर कोई नई कविता जन्म लेगी तो शेयर करूंगा, लीजिए आज यह गीत प्रस्तुत है- इंटरव्यू देते हैं रोज हम, रोज मुस्कुराते हैं| रोज़गार पाने को, आवश्यक मुस्काना,उनको क्या गरज हमारी पतली हालत…
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सूर्यमुखी का प्रण!
अपनी रचनाओं को शेयर करने के क्रम में आज यह अंतिम पुरानी रचना है, जो बहुत प्रयास करने पर भी पूरी याद नहीं आ सकी| इसे मैं कुछ जगह इसकी तुरपाई करने के बाद प्रस्तुत कर रहा हूँ| इस रचना में मैंने जीवन के, दिन के और मौसम के तीन चरणों को एक साथ प्रस्तुत…