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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Jul 2021

    ओ जाने वाले हो सके तो!

    कल हमारे प्रिय गायक, महान कलाकार और इंसान मुकेश चंद्र माथुर जी का जन्म दिन है| जिन्हें हम प्रेम से सिर्फ ‘मुकेश’ नाम से पुकारते हैं| उनकी स्मृति में प्रस्तुत आज का यह गीत फिल्म- ‘बंदिनी’ से है, जिसे लिखा था शैलेन्द्र जी ने और इसका संगीत दिया था सचिन देव बर्मन जी ने| मुकेश…

  • 22nd Jul 2021

    खामोशी पहचाने कौन!

    एक बार फिर से आज मैं अपने अत्यंत प्रिय शायरों में से एक, स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह की सुरीली जोड़ी ने बहुत खूबसूरत अंदाज में गाया है| निदा फ़ाज़ली साहब ने कुछ बेमिसाल गीत, ग़ज़लें और दोहे लिखे हैं और यह भी उनमें…

  • 21st Jul 2021

    जनकवि शैलेन्द्र

    फिल्मी दुनिया के जनकवि स्वर्गीय शैलेन्द्र जी की मृत्यु होने पर जनकवि बाबा नागार्जुन जी द्वारा उनके प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप लिखी गई एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| इस कविता से मालूम होता कि बाबा नागार्जुन के मन में, फिल्मी दुनिया में सक्रिय अपने इस सृजनशील साथी के प्रति कितना स्नेह, लगाव और आदर…

  • 20th Jul 2021

    वही थोड़ा सा आदमी!

    अशोक वाजपेयी जी आधुनिक कवियों की जमात में अग्रिम पंक्ति में नज़र आते हैं| उन्होंने मध्य प्रदेश में और केंद्र में भी सांस्कृतिक उत्थान से जुड़े अनेक पदों को सुशोभित किया| मध्य प्रदेश का ‘भारत भवन’ उनका सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन हेतु बहुत बड़ा कदम था| लीजिए आज प्रस्तुत है, अशोक वाजपेयी जी की यह…

  • 19th Jul 2021

    बस प्यार ही प्यार पले !

    आज किशोर कुमार जी द्वारा स्वयं निर्मित फिल्म – ‘दूर गगन की छाँव में’ के लिए उनके ही द्वारा गाया गया एक गीत शेयर कर रहा हूँ, इस गीत का संगीत भी किशोर कुमार जी ने ही दिया है और इसमें उनके पुत्र अमित कुमार की भी आवाज है| कुल मिलाकर ये एक बहुत सुंदर…

  • 18th Jul 2021

    जो लेके एक भी अच्छी ख़बर नहीं आते!

    वसीम बरेलवी साहब आज के एक मशहूर शायर हैं जो अपने सहज भाव से कही गए, गहराई से भरे शेरों से जनता को बांध लेते हैं| मैंने भी अपने संस्थान के लिए किए गए आयोजनों में दो बार उनको आमंत्रित किया था| लीजिए आज प्रस्तुत है, जनाब वसीम बरेलवी साहब की यह ग़ज़ल– तुम्हारी राह…

  • 17th Jul 2021

    ज्यों कीं त्यों धर दीनी चदरिया!

    आज मन हो रहा कि संत कबीर दास जी को याद कर लें| कवि-कलाकार आदि आज की ज़िंदगी का चित्रण अपने हिसाब से करते रहते हैं और हम उनकी प्रस्तुति को देखते/पढ़ते रहते हैं| आज देखते हैं कि संत कबीर दास जी के इस बारे में क्या विचार हैं| वैसे इस भजन की पंक्तियों का…

  • 16th Jul 2021

    तुम हो जाओ अविचल!

    आज मैं पुनः अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा हूँ| आज मैं विख्यात कवि, नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने…

  • 15th Jul 2021

    ऑनलाइन इंटरव्यू!

    अपनी पुरानी और कुछ नई कविताएं शेयर करने का सिलसिला फिलहाल बंद करता हूँ, आज इस क्रम की अंतिम कविता के साथ| फिर कोई नई कविता जन्म लेगी तो शेयर करूंगा, लीजिए आज यह गीत प्रस्तुत है- इंटरव्यू देते हैं रोज हम, रोज मुस्कुराते हैं| रोज़गार पाने को, आवश्यक मुस्काना,उनको क्या गरज हमारी पतली हालत…

  • 14th Jul 2021

    सूर्यमुखी का प्रण!

    अपनी रचनाओं को शेयर करने के क्रम में आज यह अंतिम पुरानी रचना है, जो बहुत प्रयास करने पर भी पूरी याद नहीं आ सकी| इसे मैं कुछ जगह इसकी तुरपाई करने के बाद प्रस्तुत कर रहा हूँ| इस रचना में मैंने जीवन के, दिन के और मौसम के तीन चरणों को एक साथ प्रस्तुत…

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