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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Aug 2021

    Alisha was her name!

    Yes, she was Alisha, though if she reads it, she would say I am still Alisha, I am still there, Yes in a way but now she may not read it and if she reads and says something, we may not be able to listen to that! Was it yesterday or 2 – 3 days…

  • 21st Aug 2021

    वो ज़माना याद है!

    हसरत मोहानी जी की एक ग़ज़ल के कुछ शेर आज शेयर कर रहा हूँ| इस ग़ज़ल के कुछ शेर ग़ुलाम अली जी ने भी गाए थे| ग़ुलाम अली साहब की आवाज़ में इस ग़ज़ल का फिल्म- ‘निकाह’ में बड़ा खूबसूरत इस्तेमाल किया गया है| लीजिए आज हसरत मोहानी जी की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए-…

  • 20th Aug 2021

    काला काला है युगबोध!

    केदारनाथ सिंह जी आधुनिक हिन्दी कविता का एक प्रमुख हस्ताक्षर रहे हैं, जिनको साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार प्राप्त हुए थे| हर कवि का अपना अलग अंदाज़-ए-बयां होता है| आज केदारनाथ सिंह जी के रचनाकर्म की बानगी उनकी इस कविता के माध्यम से देखते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है केदारनाथ सिंह जी…

  • 19th Aug 2021

    मेरे हमसफ़र उदास न हो!

    आज साहिर लुधियानवी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| साहिर जी ने भारतीय फिल्मों को बहुत सुंदर गीत दिए हैं और वे भारत के नामवर शायरों में शुमार होते थे और अपनी कला और स्वाभिमान के लिए जाने जाते थे| लीजिए आज साहिर जी के इस गीत का आनंद लीजिए- मेरे नदीम मेरे…

  • 18th Aug 2021

    यार जुलाहे!

    आज गुलज़ार साहब की एक नज़्म शेयर कर रहा हूँ, गुलज़ार साहब की शायरी उनके अंदाज़ ए बयां के कारण अलग से पहचानी जाती है| आज की इस नज़्म में भी उन्होंने इंसानी रिश्तों में, प्रेम संबंधों में पड़ जाने वाली गांठों का बड़ी सहजता और प्रभावी ढंग से बयान किया है, जुलाहे की कलाकारी…

  • 17th Aug 2021

    चांद पागल है!

    आज राहत इन्दौरी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, राहत साहब की शायरी में अक्सर एक ‘पंच’ होता है जो अचानक श्रोताओं को अपनी ओर खींच लेता है, कोई ऐसी बात जिसकी हम सामान्यतः कविता / शायरी में उम्मीद नहीं करते, जैसे आज की इस ग़ज़ल में ही- ‘चांद पागल है, अंधेरे की…

  • 16th Aug 2021

    विजयी विश्व तिरंगा प्यारा|

    हमारी स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अवसर पर मैं अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा हूँ, जो मैंने आज से दो वर्ष पूर्व लंदन में रहते हुए लिखी थी, समय के हिसाब से मैंने इसे थोड़ा अद्यतन कर दिया है| कल हमने अपनी महान स्वाधीनता के 75 वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, अमृत…

  • 15th Aug 2021

    वर्ना रो पड़ोगे!

    आज एक बार फिर मैं अपने अग्रज और गुरु तुल्य तथा हिन्दी काव्य मंचों के प्रसिद्ध गीतकार स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रचना अपना परिचय स्वयं देती है, लीजिए प्रस्तुत है डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का यह गीत- बंद होंठों में छुपा लोये हँसी के फूलवर्ना रो पड़ोगे।…

  • 14th Aug 2021

    बतावत आपनो नाम सुदामा!

    नरोत्तम दास जी द्वारा लिखित ‘सुदामा चरित’ का प्रसंग आज याद आ रहा है| बचपन में अपनी पाठ्य पुस्तकों में हम यह प्रसंग पढ़ चुके हैं| शायद यह भी सही है कि उस समय हमारा मन इतना पवित्र होता है कि इस तरह के प्रसंग हमारे कोमल मन में गहरा स्थान बना लेते हैं| ऐसे…

  • 13th Aug 2021

    सियासत अंधेरों का घर हो गई!

    हिन्दी काव्य मंचों के प्रसिद्ध गीतकार जो ओजपूर्ण कविता और सरस गीतों के लिए प्रसिद्ध थे, स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी की लिखी एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| मैंने पहले भी शेयर किए हैं, आज प्रस्तुत है यह गीत| रचना अपना परिचय स्वयं देती है, लीजिए प्रस्तुत है यह प्रेम में कुछ अलग ही परिस्थितियों…

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