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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Sep 2021

    बदनाम न हो प्यार मेरा!

    आज मैं एक बार फिर से हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी और लता जी का गाया एक युगल गीत शेयर कर रहा हूँ, 1953 में रिलीज़ हुई राज कपूर जी की फिल्म- ‘आह’ के लिए इस गीत को लिखा था हसरत जयपुरी जी ने और शंकर – जयकिशन की संगीतमय जोड़ी के संगीत निर्देशन…

  • 1st Sep 2021

    हाट-बाज़ारों बिक न सका मैं!

    आज मैं कुशल गीतकार नईम जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| नईम जी ने इस नवगीत में कवि की निष्ठा और प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है| बाकी कविता अपनी बात स्वयं कहती है| लीजिए प्रस्तुत है ये गीत- लिखने जैसा लिख न सका मैंसिकता रहा भाड़ में लेकिन,ठीक तरह से सिक न सका…

  • 31st Aug 2021

    इससे पहले कि बेवफा हो जाएं !

    आज एक बार फिर मैं भारतीय उपमहाद्वीप के बहुत विख्यात शायर अहमद फराज़ साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| फराज़ साहब अपने अंदाज़ ए बयां और बेहतरीन ग़ज़लों के लिए जाने जाते थे और वे पाकिस्तान के संभवतः सबसे प्रसिद्ध शायरों में शामिल थे| लीजिए आज फराज़ साहब की इस ग़ज़ल का आनंद…

  • 30th Aug 2021

    अगर रिश्ते नहीं ढोते !

    आज एक बार फिर मैं अपने अत्यंत प्रिय कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में रंजक जी ने इस स्थिति पर प्रहार किया है कि लोग ज़िंदगी भर औपचारिकताओं को ढोते हैं| क्या ही अच्छा हो कि हम प्रेम के संबंध जिए और मात्र औपचारिकता वाले रिश्तों…

  • 29th Aug 2021

    सार्वजनिक ज़िंदगी!

    आज मैं स्वर्गीय सुदामा प्रसाद पांडे जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, जिनको कविता की दुनिया में ‘धूमिल’ नाम से जाना जाता था| धूमिल जी के पास चीजों और घटनाओं को देखने का अलग ही नजरिया था, एक अलग मुहावरा था, जिसमें वे आम आदमी की स्थितियों का बड़ा सटीक वर्णन करते थे|…

  • 28th Aug 2021

    चांदनी जगाती है!

    हिन्दी साहित्य का एक जगमगाता सितारा थे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी| विख्यात साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ का सफल संपादन तो उन्होंने लंबे समय तक किया ही, उनका अमूल्य योगदान साहित्य की सभी विधाओं- कविता, कहानी, उपन्यास आदि में उल्लेखनीय है| मैंने पहले भी उनकी कुछ रचनाएं शेयर की हैं, आज एक और रचना शेयर कर रहा…

  • 27th Aug 2021

    कविता – पाबलो नेरुदा

    आज फिर से, लंबे अंतराल के बाद, मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के…

  • 26th Aug 2021

    प्यार का आलम गुज़र गया!

    आज एक बार फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक स्वर्गीय मुकेश चंद्र माथुर जी का एक प्यारा सा गीत शेयर कर रहा हूँ, जिनको हम प्यार से सिर्फ ‘मुकेश’ नाम से जानते हैं| फिल्म- ‘प्यार की राहें’ के लिए इस गीत को ‘प्रेम धवन’ जी ने लिखा था, इसका संगीत – कनू घोष जी…

  • 25th Aug 2021

    कवियों के कंकाल!

    कृष्ण कल्पित जी मेरे अत्यंत प्रिय मित्र रहे हैं| मैं 1980 से 1983 तक आकाशवाणी, जयपुर में कार्यरत था, उस दौरान ही मेरा युवा कवि कृष्ण कल्पित जी से परिचय हुआ, वैसे मैं भी उस समय युवा था, उनसे कुछ वर्ष बड़ा था| उस समय कल्पित जी का एक गीत बहुत प्रसिद्ध था उसकी कुछ…

  • 24th Aug 2021

    लेकिन मकाँ नहीं मिलता!

    निदा फ़ाज़ली साहब मेरे अत्यंत प्रिय शायर रहे हैं| उनमें कवि-शायर और संत, सबके गुण शामिल थे| क्या दोहे, क्या ग़ज़लें और क्या गीत, हर जगह उन्होंने अपना कमाल दिखाया था| उनकी प्रमुख विशेषता थी सरल भाषा में गहरी बात कहना| लीजिए आज निदा फ़ाज़ली साहब की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- कभी किसी को…

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