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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th May 2022

    और फैला है धुआँ मेरा!

    किसी बस्ती को जब जलते हुए देखा तो ये सोचा,मैं ख़ुद ही जल रहा हूँ और फैला है धुआँ मेरा| बेकल उत्साही

  • 15th May 2022

    ठिकाना है कहाँ मेरा!

    सुनहरी सरज़मीं मेरी, रुपहला आसमाँ मेरा,मगर अब तक नहीं समझा, ठिकाना है कहाँ मेरा| बेकल उत्साही

  • 15th May 2022

    सुर्ख़ियों मे बिखेरता है मुझे!

    सुब्‌ह अख़बार की हथेली पर,सुर्ख़ियों मे बिखेरता है मुझे| बेकल उत्साही

  • 15th May 2022

    तारों से झाँकता है मुझे!

    रात तनहाइयों के आंगन में,चांद तारों से झाँकता है मुझे| बेकल उत्साही

  • 15th May 2022

    हर इक से पूछता है मुझे!

    वो तो मुद्दत से जानता है मुझे,फिर भी हर इक से पूछता है मुझे| बेकल उत्साही

  • 15th May 2022

    आकुल अंतर!

    आज फिर से सुरीले गीतों के सृजक और कवि कुल के गौरव सीनियर बच्चन जी, अर्थात स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| कवि जब व्याकुलता का अनुभव करता है तो वह सभी को किसी न किसी रूप में अपनी व्याकुलता में शामिल कर लेता है| लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय…

  • 14th May 2022

    तन्हाई नहीं जाने वाली!

    आज सड़कों पे चले आओ तो दिल बहलेगा,चन्द ग़ज़लों से तन्हाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार

  • 14th May 2022

    ख़ुदाई नहीं जाने वाली!

    तू परेशां है, तू परेशान न हो,इन ख़ुदाओं की ख़ुदाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार

  • 14th May 2022

    सुनाई नहीं जाने वाली!

    चीख़ निकली तो है होंठों से मगर मद्धम है,बंद कमरों को सुनाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार

  • 14th May 2022

    ये खाई नहीं जाने वाली!

    एक तालाब-सी भर जाती है हर बारिश में,मैं समझता हूँ ये खाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार

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