-
और फैला है धुआँ मेरा!
किसी बस्ती को जब जलते हुए देखा तो ये सोचा,मैं ख़ुद ही जल रहा हूँ और फैला है धुआँ मेरा| बेकल उत्साही
-
ठिकाना है कहाँ मेरा!
सुनहरी सरज़मीं मेरी, रुपहला आसमाँ मेरा,मगर अब तक नहीं समझा, ठिकाना है कहाँ मेरा| बेकल उत्साही
-
सुर्ख़ियों मे बिखेरता है मुझे!
सुब्ह अख़बार की हथेली पर,सुर्ख़ियों मे बिखेरता है मुझे| बेकल उत्साही
-
आकुल अंतर!
आज फिर से सुरीले गीतों के सृजक और कवि कुल के गौरव सीनियर बच्चन जी, अर्थात स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| कवि जब व्याकुलता का अनुभव करता है तो वह सभी को किसी न किसी रूप में अपनी व्याकुलता में शामिल कर लेता है| लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय…
-
तन्हाई नहीं जाने वाली!
आज सड़कों पे चले आओ तो दिल बहलेगा,चन्द ग़ज़लों से तन्हाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार
-
ख़ुदाई नहीं जाने वाली!
तू परेशां है, तू परेशान न हो,इन ख़ुदाओं की ख़ुदाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार
-
सुनाई नहीं जाने वाली!
चीख़ निकली तो है होंठों से मगर मद्धम है,बंद कमरों को सुनाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार
-
ये खाई नहीं जाने वाली!
एक तालाब-सी भर जाती है हर बारिश में,मैं समझता हूँ ये खाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार