-
चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें!
अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले,कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें| सुदर्शन फ़ाकिर
-
चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें!
हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें,चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें| सुदर्शन फ़ाकिर
-
याचना नहीं, अब रण होगा!
राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह जी ‘दिनकर’ राष्ट्र की ऐसी विभूति थे कि मैं उनके संबंध में क्या कहूँ! आज बड़े विनम्र भाव से उनकी एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ, जिसमें प्रसंग यह है कि योगिराज श्रीकृष्ण जी पांडवों की ओर से दुर्योधन के पास शांति का प्रस्ताव लेकर जाते हैं लेकिन वह मूर्ख…