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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Nov 2021

    चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें!

    अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले,कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 3rd Nov 2021

    चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें!

    हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें,चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 3rd Nov 2021

    और वो मुस्कुरा दें!

    अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें,हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 3rd Nov 2021

    वह देश कौन सा है!

    आज फिर से एक पुराने युग की कविता, ऐसी कविता जिसका कुछ अंश मैंने अपनी प्रारंभिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में पढ़ा था| समय के साथ हमारा ज्ञान बढ़ता गया है, हमारे विचार अंतर्राष्ट्रीय होते गए हैं और हम या तो अति उदार या अति कट्टर होते गए हैं राष्ट्र के प्रति श्रद्धा की जो पवित्र…

  • 2nd Nov 2021

    इसकी आदत भी आदमी सी है!

    वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर, इसकी आदत भी आदमी सी है| गुलज़ार

  • 2nd Nov 2021

    कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी!

    कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी,एक तस्लीम लाज़मी सी है| गुलज़ार

  • 2nd Nov 2021

    बर्फ पलकों पे क्यूँ!

    कौन पथरा गया है आँखों में, बर्फ़ पलकों पे क्यूँ जमी सी है| गुलज़ार

  • 2nd Nov 2021

    नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है!

    दफ़्न कर दो हमें कि साँस आए, नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है| गुलज़ार

  • 2nd Nov 2021

    आपकी कमी सी है!

    शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आपकी कमी सी है| गुलज़ार

  • 2nd Nov 2021

    याचना नहीं, अब रण होगा!

    राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह जी ‘दिनकर’ राष्ट्र की ऐसी विभूति थे कि मैं उनके संबंध में क्या कहूँ! आज बड़े विनम्र भाव से उनकी एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ, जिसमें प्रसंग यह है कि योगिराज श्रीकृष्ण जी पांडवों की ओर से दुर्योधन के पास शांति का प्रस्ताव लेकर जाते हैं लेकिन वह मूर्ख…

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