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बिजली, घटा, मल्हार है!
सावन का इश्तिहार है, उस शोख़ का बदन,बिजली, घटा, मल्हार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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मिलते हैं चंद साए!
मिलते हैं चंद साए, धुँधलकों में अब जिधर,इक पीर का मज़ार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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बूढ़ों का ये विचार है!
अश्कों में भीगकर जो, मिठाता है और भी,बूढ़ों का ये विचार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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जामुन का पेड़ है!
हम हैं, ख़याले यार है, जामुन का पेड़ है,बारिश का इंतज़ार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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तीलियों का पुल !
आज एक बार फिर से मैं अपने अत्यंत प्रिय नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक के बहुत से गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं और उनके बारे में बहुत से अपने संस्मरण भी लिखे हैं|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत – मुझे…
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दोस्तों की दोस्ती है सामने मेरे!
जब दोस्तों की दोस्ती है सामने मेरे,दुनिया में दुश्मनी की मिसालों को क्या करूँ| राजेश रेड्डी
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उठते सवालों को क्या करूँ!
मैं जानता हूँ सोचना अब एक जुर्म है,लेकिन मैं दिल में उठते सवालों को क्या करूँ| राजेश रेड्डी
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मैं शिवालों को क्या करूँ!
दिल ही बहुत है मेरा इबादत के वास्ते,मस्जिद को क्या करूँ मैं शिवालों को क्या करूँ| राजेश रेड्डी
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पाँवों के छालों को क्या करूँ!
चलना ही है मुझे मेरी मंज़िल है मीलों दूर,मुश्किल ये है कि पाँवों के छालों को क्या करूँ| राजेश रेड्डी
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उजालों को क्या करूँ!
मेरे ख़ुदा मैं अपने ख़यालों को क्या करूँ,अंधों के इस नगर में उजालों को क्या करूँ| राजेश रेड्डी