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कहीं तिश्नगी बेहिसाब है!
कहीं आँसुओं की है दास्ताँ, कहीं मुस्कुराहटों का बयाँ,कहीं बर्क़तों की है बारिशें कहीं तिश्नगी बेहिसाब है| राजेश रेड्डी
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कहीं मेहरबां बेहिसाब है!
कहीं खो दिया कहीं पा लिया, कहीं रो लिया कहीं गा लिया,कहीं छीन लेती है हर ख़ुशी, कहीं मेहरबां बेहिसाब है| राजेश रेड्डी
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हर ओर कलियुग के चरण!
स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक गीत और आज शेयर कर रहा हूँ| भारत भूषण जी एक ऐसे गीतकार थे जिनके बारे में कहा जा सकता है कि वे अपने समय से काफी आगे की बात कहते थे| कवि सम्मेलनों में उनका काव्य पाठ सुनना एक विलक्षण अनुभव होता था| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय…
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इक अजीब सी ये नक़ाब है!
कहीं छाँव है कहीं धूप है कहीं और ही कोई रूप है,कई चेहरे इस में छुपे हुए, इक अजीब सी ये नक़ाब है| राजेश रेड्डी
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ये जो ज़िन्दगी की किताब है!
ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या किताब है| कहीं इक हसीन सा ख़्वाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब* है|वेदना* राजेश रेड्डी
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अपने तो लेकिन इम्तिहाँ मे खो गए!
ज़िंदगी हमने सुना था चार दिन का खेल है,चार दिन अपने तो लेकिन इम्तिहाँ मे खो गए| राजेश रेड्डी
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और कुछ ख़िज़ाँ में खो गए!
लेके अपनी-अपनी किस्मत आए थे गुलशन में गुल,कुछ बहारों मे खिले और कुछ ख़िज़ाँ में खो गए| राजेश रेड्डी
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अश्के-रवां में खो गए!
हसरतें जितनी भी थीं सब आह बनके उड़ गईं,ख़्वाब जितने भी थे सब अश्के-रवां में खो गए| राजेश रेड्डी
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हम जिस जहाँ मे खो गए!
जुस्तजू में जिसकी हम आए थे वो कुछ और था,ये जहाँ कुछ और है हम जिस जहाँ मे खो गए| राजेश रेड्डी
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बिछुड़े परिंदे आसमाँ मे खो गए!
डाल से बिछुड़े परिंदे आसमाँ मे खो गए,इक हकी़क़त थे जो कल तक दास्ताँ मे खो गए| राजेश रेड्डी