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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th May 2022

    वो जो इक शख़्स था वही है अभी!

    ऐसा लगता है ख़ल्वत-ए-जां में,वो जो इक शख़्स था वही है अभी| अहमद फ़राज़

  • 24th May 2022

    ऐसा लगता है टूटती है अभी!

    इस क़दर खिंच गयी है जां की कमान,ऐसा लगता है टूटती है अभी| अहमद फ़राज़

  • 24th May 2022

    मुड़ मुड़ के देखती है अभी!

    ज़िन्दगी कू-ए-ना-मुरादी से,किसको मुड़ मुड़ के देखती है अभी| अहमद फ़राज़

  • 24th May 2022

    दाग़ शायद कोई कोई है अभी!

    मैं तो समझा था भर चुके सब ज़ख़्म,दाग़ शायद कोई कोई है अभी| अहमद फ़राज़

  • 24th May 2022

    बर्फ़ सी दिल पे गिर रही है अभी!

    मैं भी किस वादी-ए-ख़याल में था,बर्फ़ सी दिल पे गिर रही है अभी| अहमद फ़राज़

  • 24th May 2022

    ज़ुल्फ़ों में टांकती है अभी!

    फ़सले-गुल में बहार पहला गुलाब,किसकी ज़ुल्फ़ों में टांकती है अभी| अहमद फ़राज़

  • 24th May 2022

    दूरियों में भी दिलकशी है अभी!

    क़ुरबतें* लाख खूबसूरत हों,दूरियों में भी दिलकशी है अभी | *नज़दीकियाँ अहमद फ़राज़

  • 24th May 2022

    कैसा मौसम है कुछ नहीं खुलता!

    कैसा मौसम है कुछ नहीं खुलता,बूंदा-बांदी भी धूप भी है अभी| अहमद फ़राज़

  • 24th May 2022

    याद का आसरा!

    स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी हिन्दी के एक श्रेष्ठ साहित्यकार थे जिनको पद्मश्री सम्मान तथा अनेक साहित्यिक पुरस्कार प्रदान किए गए थे और उन्होंने बच्चों की पत्रिका ‘पराग’ का कुशल संपादन भी किया था| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का यह गीत – तेरी याद का ले के आसरा,मैं कहाँ-कहाँ से गुज़र गया,उसे…

  • 23rd May 2022

    रुक रुक के चल रही है अभी!

    मैं भी शहरे-वफ़ा में नौवारिद,वो भी रुक रुक के चल रही है अभी| अहमद फ़राज़

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