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चलो अब यादगारों की अंधेरी कोठरी खोलें!
चलो अब यादगारों की अंधेरी कोठरी खोलें,कम-अज़-कम एक वो चेहरा तो पहचाना हुआ होगा। दुष्यंत कुमार
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किस तरह जलसा हुआ होगा !
यहाँ तो सिर्फ़ गूंगे और बहरे लोग बसते हैंख़ुदा जाने यहाँ पर किस तरह जलसा हुआ होगा । दुष्यंत कुमार
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ऐसा नहीं ऐसा हुआ होगा!
कई फ़ाक़े बिता कर मर गया जो उस के बारे मेंवो सब कहते हैं अब ऐसा नहीं ऐसा हुआ होगा। दुष्यंत कुमार
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कोई हांका हुआ होगा!
तुम्हारे शहर में ये शोर सुन सुन कर तो लगता हैकि इंसानों के जंगल में कोई हांका हुआ होगा। दुष्यंत कुमार
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वहां पर क्या हुआ होगा!
ग़ज़ब ये है की अपनी मौत की आहट नहीं सुनतेवो सब के सब परेशां हैं वहां पर क्या हुआ होगा। दुष्यंत कुमार
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पानी कहां ठहरा हुआ होगा!
यहां तक आते आते सूख जाती है कई नदियां मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा। दुष्यंत कुमार
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आपको धोखा हुआ होगा!
ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगामैं सज्दे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा । दुष्यंत कुमार
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अगले जनम की बात छोड़ो
स्वर्गीय किशन सरोज जी असाधारण प्रतिभा वाले परंतु अत्यंत सहज और शालीन व्यवहार वाले व्यक्ति थे| उनसे मिलना, उनसे बातें करना और सबसे ज्यादा उनका काव्य पाठ सुनना बहुत अच्छा लगता था| उनके अनेक गीत मैं दिल से पसंद करता हूँ और मैंने शेयर भी किए हैं| एक ऐसे स्वाभिमानी रचनाकार जो कहते हैं ‘नागफनी…
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आख़िरी सांस तक बेक़रार आदमी!
ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र,आख़िरी सांस तक बेक़रार आदमी| निदा फ़ाज़ली