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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st May 2022

    मेरे नाम से जलते क्यों हैं!

    मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ,रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं| राहत इन्दौरी

  • 31st May 2022

    घर से निकलते क्यों हैं!

    लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं,इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं| राहत इन्दौरी

  • 31st May 2022

    पैमाना कि दिल है मेरा!

    जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा,बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं| राहत इन्दौरी

  • 31st May 2022

    देखी थी बरसात मुझे होश नहीं!

    आँसुओं और शराबों में गुजारी है हयात,मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं| राहत इन्दौरी

  • 31st May 2022

    नहीं मालूम कि जाना है कहाँ!

    मुझको ये भी नहीं मालूम कि जाना है कहाँ,थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं| राहत इन्दौरी

  • 31st May 2022

    कैसे कटी रात मुझे होश नहीं!

    कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं,रात के साथ गई बात मुझे होश नहीं| राहत इन्दौरी

  • 31st May 2022

    बेटी बेटे!

    हमारी हिन्दी फिल्मों के माध्यम से हमको अनेक अमर गीत देने वाले स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का आज एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत फिल्म- बेटी-बेटे में फिल्माया गया| गीत में यही है कि किस प्रकार एक माँ अपने बेटे-बेटी को समझाती है कि आज का दिन तो बीत गया अब हमको कल की…

  • 30th May 2022

    वह व्याकरण खो गया!

    हमने पढ़कर जिसे प्यार सीखा कभीएक गलती से वह व्याकरण खो गया| रामावतार त्यागी

  • 30th May 2022

    हमारा तुम्हारा गगन खो गया!

    यह जमीं तो कभी भी हमारी न थी,वह हमारा तुम्हारा गगन खो गया| रामावतार त्यागी

  • 30th May 2022

    मूलधन खो गया!

    दोस्ती का सभी ब्याज़ जब खा चुके,तब पता यह चला, मूलधन खो गया| रामावतार त्यागी

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