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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Nov 2021

    उम्र कम कर रहा था मेरी!

    वो उम्र कम कर रहा था मेरी,मैं साल अपने बढ़ा रहा था| गुलज़ार

  • 18th Nov 2021

    कहानी सुना रहा था!

    वो एक दिन एक अजनबी को,मेरी कहानी सुना रहा था| गुलज़ार

  • 18th Nov 2021

    मेरा ख़ुदा रहा था!

    उसी का ईमां बदल गया है,कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था| गुलजार

  • 18th Nov 2021

    और भी हो गया नुमायाँ!

    कुछ और भी हो गया नुमायां,मैं अपना लिखा मिटा रहा था| गुलज़ार

  • 18th Nov 2021

    पुरज़े उड़ा रहा था!

    वो ख़त के पुरज़े उड़ा रहा था,हवाओं का रुख़ दिखा रहा था| गुलज़ार

  • 18th Nov 2021

    हमारा कोई नहीं!

    हम डोले ऑल अलॉन्ग हमारा कोई नहीं, मिड ओशन में है बोट, किनारा कोई नहीं| (कहीं सुना हुआ)

  • 18th Nov 2021

    उस निगाह के बाद!

    जनाब कृष्ण बिहारी ‘नूर’ साहब भारत के प्रसिद्ध उर्दू शायरों की फेहरिस्त में शामिल हैं| उनकी बहुत सी ग़ज़लें जगजीत सिंह जी ने और अन्य प्रमुख ग़ज़ल गायकों ने गाई हैं| जैसे ‘ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता भी नहीं’ और ‘बस एक वक़्त का खंजर मेरी तलाश में है’|…

  • 17th Nov 2021

    राख हो गईं लेकिन

    हसरतें राख हो गईं लेकिन,आग अब भी कहीं दबी-सी है| जावेद अख़्तर

  • 17th Nov 2021

    सनसनी-सी है!

    कह गए हम ये किससे दिल की बात,शहर में एक सनसनी-सी है| जावेद अख़्तर

  • 17th Nov 2021

    पलकों पे जमी-सी है!

    ख़्वाब था या ग़ुबार था कोई,गर्द इन पलकों पे जमी-सी है| जावेद अख़्तर

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