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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Nov 2021

    पत्ता काट जाती है!

    अजब है आजकल की दोस्ती भी, दोस्ती ऐसी,जहाँ कुछ फ़ायदा देखा तो पत्ता काट जाती है| बेकल उत्साही

  • 20th Nov 2021

    कैंची लिफ़ाफ़ा काट जाती है!

    पहुँच जाती हैं दुश्मन तक हमारी ख़ुफ़िया बातें भी,बताओ कौन सी कैंची लिफ़ाफ़ा काट जाती है| बेकल उत्साही

  • 20th Nov 2021

    मेरा रस्ता काट जाती है!

    ये दुनिया तुझसे मिलने का वसीला काट जाती है,ये बिल्ली जाने कब से मेरा रस्ता काट जाती है| बेकल उत्साही

  • 20th Nov 2021

    तुम रहे न तुम, हम रहे न हम!

    भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर जी किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं| आज मैं लता मंगेशकर जी द्वारा गुरुदत्त जी की फिल्म – ‘कागज़ के फूल’ के लिए गाये गए एक गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ, जिसका संगीत सचिन दा अर्थात सचिन देव बर्मन जी ने दिया था| ज़िंदगी में…

  • 19th Nov 2021

    मिलना बहुत जरूरी है!

    हमने देखा है बिछुड़ों कोमिलना बहुत जरूरी है।उतने ही हम पास रहेंगे,जितनी हममें दूरी है। डॉ. कुंवर बेचैन

  • 19th Nov 2021

    धरती पर आते हैं पंछी!

    सुबह हुए तो मिले रात-दिनमाना रोज बिछुड़ते हैं,धरती पर आते हैं पंछीचाहे ऊँचा उड़ते हैं,सीधे सादे रस्ते भी तोकहीं कहीं पर मुड़ते हैं,अगर हृदय में प्यार रहे तोटूट टूटकर जुड़ते हैं| (गीत-अंश) डॉ. कुंवर बेचैन

  • 19th Nov 2021

    जिस मृग पर कस्तूरी है!

    गीत अंश जंगल जंगल भटकेगा हीजिस मृग पर कस्तूरी है।उतने ही हम पास रहेंगे,जितनी हममें दूरी है। डॉ. कुंवर बेचैन

  • 19th Nov 2021

    शाखों से फूलों की बिछुड़न!

    गीत का अंश शाखों से फूलों की बिछुड़नफूलों से पंखुड़ियों की,आँखों से आँसू की बिछुड़नहोंठों से बाँसुरियों की,तट से नव लहरों की बिछुड़नपनघट से गागरियों की,सागर से बादल की बिछुड़नबादल से बीजुरियों की| डॉ. कुंवर बेचैन

  • 19th Nov 2021

    जितनी हममें दूरी है!

    मिलना और बिछुड़ना दोनोंजीवन की मजबूरी है।उतने ही हम पास रहेंगे,जितनी हममें दूरी है। डॉ. कुंवर बेचैन

  • 19th Nov 2021

    हैं बहुत छोटे!

    मेरे लिए गुरुतुल्य रहे स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी के बहुत से गीत मैंने पहले शेयर किए हैं| बहुत ही सरल स्वभाव वाले और अत्यंत सृजनशील रचनाकार थे डॉक्टर बेचैन जी, मुझे भी उनका स्नेह प्राप्त करने का अवसर मिला था| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का यह नवगीत- जिंदगी की…

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