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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Apr 2026

    एक पैगाम आकाश के नाम!

    आज श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री सुश्री नीलम सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री नीलम सिंह जी की यह कविता – आकाश !कब तक ओढ़ोगेपरंपरा की पुरानी चादर,ढोते रहोगेव्यापक होने का झूठा दंभ, तुम्हारा उद्देश्यहीन विस्तारनहीं ढक सका हैकिसी का…

  • 22nd Apr 2026

    मन को बचाएँ कैसे!

    रस्म-ए-उल्फ़त को निभाएँ तो निभाएँ कैसे, हर तरफ़ आग है दामन को बचाएँ कैसे| नक़्श लायलपुरी

  • 22nd Apr 2026

    ज़िंदगी की बेबसी का!

    एक मुश्त-ए-ख़ाक और वो भी हवा की ज़द में है,ज़िंदगी की बेबसी का इस्तिआ’रा देखना| परवीन शाकिर

  • 22nd Apr 2026

    जाने अब क्या क्या!

    आइने की आँख ही कुछ कम न थी मेरे लिए,जाने अब क्या क्या दिखाएगा तुम्हारा देखना| परवीन शाकिर

  • 22nd Apr 2026

    सूनी सड़कों पर ये आवारा पांव!

    अ‍ॅपॅणे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में डॉक्टर धर्मवीर भारती जी का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- सूनी सड़कों पर ये आवारा पांव, माथे पर टूटे नक्षत्रों की छांव, कब तक आखिर कब तक! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 22nd Apr 2026

    ऐसी बाज़ी हारने में!

    जीतने में भी जहाँ जी का ज़ियाँ पहले से है,ऐसी बाज़ी हारने में क्या ख़सारा देखना| परवीन शाकिर

  • 22nd Apr 2026

    परचम हमारा देखना!

    जब बनाम-ए-दिल गवाही सर की माँगी जाएगी,ख़ून में डूबा हुआ परचम हमारा देखना| परवीन शाकिर

  • 22nd Apr 2026

    कई बार यूं भी देखा है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- रजनीगंधा के लिए मुकेश जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे योगेश जी ने लिखा था और इसका संगीत सलिल चौधरी जी ने तैयार किया था- कई बार यूं भी देखा है, ये जो मन की सीमारेखा है, मन तोड़ने लगता…

  • 22nd Apr 2026

    उसने मेरे बेगानेपन को ही!

    आज श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री नचिकेता जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नचिकेता जी का यह नवगीत – उसने मेरेबेगानेपन को हीछेड़ दियाघनी उमस मेंकभी न उसनेपंखा हाँका हैलसिया गए भात कोदेसी घी से छौंका हैदूध मुँहे पाड़े कोमाँ…

  • 21st Apr 2026

    अपना सितारा देखना!

    किस शबाहत को लिए आया है दरवाज़े पे चाँद, ऐ शब-ए-हिज्राँ ज़रा अपना सितारा देखना| परवीन शाकिर

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