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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Apr 2026

    मोहब्बत उसे भी थी!

    ज़िक्र-ए-शब-ए-फ़िराक़ से वहशत उसे भी थी,मेरी तरह किसी से मोहब्बत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी

  • 26th Apr 2026

    भ्रमण पिपासा – गेराल्ड गॉल्ड

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर करने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी पोस्ट| भ्रमण, यायावरी और यदि धार्मिक उद्देश्य जोड़ दें तो यह पवित्र होकर तीर्थ यात्रा बन जाता है।जी हाँ, आज गेराल्ड गॉल्ड की अंग्रेजी कविता ‘Wander thirst’ याद आ रही है, जो मुझे बचपन से ही बहुत प्रिय रही…

  • 25th Apr 2026

    वो शफ़क़ है कि धनक है!

    बन गई नक़्श जो सुर्ख़ी तिरे अफ़्साने की,वो शफ़क़ है कि धनक है कि हिना है क्या है| नक़्श लायलपुरी

  • 25th Apr 2026

    किसी को देखते ही !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी की ग़ज़ल के कुछ और शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ-किसी को देखते ही आपका ऐहसास होता है! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। *****

  • 25th Apr 2026

    फ़रिश्ता है ख़ुदा है क्या है!

    दिल ख़तावार-ए-नज़र पारसा तस्वीर-ए-अना,वो बशर है कि फ़रिश्ता है ख़ुदा है क्या है| नक़्श लायलपुरी

  • 25th Apr 2026

    ये तिरा नाज़ है शोख़ी है!

    होश में ला के मिरे होश उड़ाने वाले,ये तिरा नाज़ है शोख़ी है अदा है क्या है| नक़्श लायलपुरी

  • 25th Apr 2026

    जिस दिल में बसा था प्यार तेरा!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म सहेली का अत्यंत लोकप्रिय गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मुकेश जी और लता जी ने गाया था, इंदीवर जी ने यह गीत लिखा था और इसका संगीत कल्याणजी आनंदजी ने तैयार किया था- जिस दिल में बसा था प्यार तेरा, उस दिल…

  • 25th Apr 2026

    इसके लेखे संसद-फंसद सब फ़िजूल है!

    आज एक बार फिर मैं जनकवि बाबा नागार्जुन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नागार्जुन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन जी की यह कविता – इसके लेखे संसद=फंसद सब फ़िजूल हैइसके लेखे संविधान काग़ज़ी फूल हैइसके लेखेसत्य-अंहिसा-क्षमा-शांति-करुणा-मानवताबूढ़ों की बकवास मात्र हैइसके…

  • 24th Apr 2026

    ज़माना आ गया रुसवाईयों तक!

    मेरे यूटयूब चैनल के माध्यम से आज की प्रस्तुति है मेरे स्वर में स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी की ग़ज़ल के कुछ शेर – ज़माना आ गया रुसवाईयों तक तुम नहीं आए! आशा है आपको यह पसंद आएंगे, धन्यवाद ।

  • 24th Apr 2026

    तू तसल्ली है दिलासा है!

    नाम होंटों पे तिरा आए तो राहत सी मिलेतू तसल्ली है दिलासा है दुआ है क्या है| नक़्श लायलपुरी

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