Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 29th Jun 2022

    मगर नींद भी न आई हो!

    वो तो सोते जागते रहने के मौसमों का फुसूँ,कि नींद में हों मगर नींद भी न आई हो| परवीन शाकिर

  • 29th Jun 2022

    खिड़की से मुस्कराई हो!

    कभी तो हो मेरे कमरे में ऐसा मंज़र भी,बहार देख के खिड़की से मुस्कराई हो| परवीन शाकिर

  • 29th Jun 2022

    मेहँदी की बाड़ उगाई हो!

    गुलाबी पाँव मेरे चम्पई बनाने को,किसी ने सहन में मेहँदी की बाड़ उगाई हो| परवीन शाकिर

  • 29th Jun 2022

    प्यार हवा मेरे नाम लाई हो!

    कोई तो हो जो मेरे तन को रोशनी भेजे,किसी का प्यार हवा मेरे नाम लाई हो| परवीन शाकिर

  • 29th Jun 2022

    रंग मेरे हाथ का हिनाई हो!

    हथेलियों की दुआ फूल ले के आई हो,कभी तो रंग मेरे हाथ का हिनाई हो| परवीन शाकिर

  • 29th Jun 2022

    गलियाँ बड़ी सुनसान हैं आए कोई!

    कोई आहट, कोई आवाज़, कोई छाप नहीं,दिल की गलियाँ बड़ी सुनसान हैं आए कोई| परवीन शाकिर

  • 29th Jun 2022

    राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं!

    अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं,अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई| परवीन शाकिर

  • 29th Jun 2022

    न कभी टूट कर, बिखरे कोई!

    जिस तरह ख़्वाब हो गए मेरे रेज़ा-रेज़ा,इस तरह से, न कभी टूट कर, बिखरे कोई| परवीन शाकिर

  • 29th Jun 2022

    तेरा नाम न पढ़ ले कोई!

    काँप उठती हूँ मैं सोच कर तन्हाई में,मेरे चेहरे पर तेरा नाम न पढ़ ले कोई| परवीन शाकिर

  • 29th Jun 2022

    बिखरने से न रोके कोई!

    अक़्स-ए-ख़ुशबू हूँ, बिखरने से न रोके कोई,और बिखर जाऊँ तो, मुझको न समेटे कोई| परवीन शाकिर

←Previous Page
1 … 1,200 1,201 1,202 1,203 1,204 … 1,527
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar