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आज अपना ज़माना है!
या वो थे ख़फ़ा हमसे या हम हैं ख़फ़ा उनसे, कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है| जिगर मुरादाबादी
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ठेकेदार भाग लिया!
प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| मेरा खयाल है कि अशोक चक्रधर जी से तो आप सभी परिचित होंगे| इस कविता में भी एक प्रकार की हड़ताल ही है जिसे मनुष्य नहीं भवन निर्माण जैसे कार्यों में प्रयुक्त होने वाले यंत्र और सामग्री कर रहे हैं,…
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नाज़ुक सा फ़साना है!
आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं, नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है| जिगर मुरादाबादी
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आहों का ज़माना है!
आग़ाज़-ए-मोहब्बत है आना है न जाना है, अश्कों की हुकूमत है आहों का ज़माना है| जिगर मुरादाबादी
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ठोकर में ज़माना है!
क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है, हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है| जिगर मुरादाबादी
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हँसने को ज़माना है !
हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है, रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है | जिगर मुरादाबादी
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जो अश्क है आँखों में!
ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है, जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है| जिगर मुरादाबादी
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सिमटे तो दिल-ए-आशिक़!
इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है, सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है| जिगर मुरादाबादी
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भारत का यह रेशमी नगर!
आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की एक लंबी कविता, देश की राजधानी दिल्ली के बारे में, देश की राजनीति और सामाजिक जीवन, समृद्धि, संस्कृति आदि विभिन्न पक्षों के संबंध में दिनकर जी ने विस्तार से इस कविता में अपने भाव व्यक्त किए हैं| लीजिए प्रस्तुत है यह विशिष्ट कविता– दिल्ली फूलों में बसी, ओस-कण…