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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Jul 2022

    किरन फूल की पत्तियों में दबी!

    किरन फूल की पत्तियों में दबी, हँसी उस के होंठों पे आई हुई| बशीर बद्र

  • 2nd Jul 2022

    दोपहर का खिला फूल है!

    भरी दोपहर का खिला फूल है, पसीने में लड़की नहाई हुई| बशीर बद्र

  • 2nd Jul 2022

    दुल्हन है जलाई हुई!

    बड़े ताजिरों की सताई हुई, ये दुनिया दुल्हन है जलाई हुई| बशीर बद्र

  • 2nd Jul 2022

    वहाँ भी!

    कल मैंने हास्य-व्यंग्य कवि श्री अशोक चक्रधर की एक कविता शेयर की थी तो सोचता हूँ कि आज आधुनिक हिन्दी कविता के एक प्रमुख हस्ताक्षर श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर लूँ| वाजपेयी जी एक प्रमुख कवि होने के अलावा एक उच्च अधिकारी भी रहे हैं और भोपाल का ‘भारत भवन’ उनकी…

  • 1st Jul 2022

    अब दिल को ख़ुदा रक्खे!

    ख़ुद्दारी-ओ-महरूमी, महरूमी-ओ-ख़ुद्दारी, अब दिल को ख़ुदा रक्खे अब दिल का ज़माना है| जिगर मुरादाबादी

  • 1st Jul 2022

    लाज़िम उन्हें आना है!

    मुझको इसी धुन में है हर लहज़ा बसर करना, अब आए वो अब आए, लाज़िम उन्हें आना है| जिगर मुरादाबादी

  • 1st Jul 2022

    मरने का ज़माना है!

    ये हुस्न-ओ-जमाल उनका ये इश्क़-ओ-शबाब अपना, जीने की तमन्ना है मरने का ज़माना है| जिगर मुरादाबादी

  • 1st Jul 2022

    इक नक़्श दिखाना है!

    तस्वीर के दो रुख़ हैं जाँ और ग़म-ए-जानाँ, इक नक़्श छुपाना है इक नक़्श दिखाना है| जिगर मुरादाबादी

  • 1st Jul 2022

    आईना है शाना है!

    ख़ुद हुस्न-ओ-शबाब उनका क्या कम है रक़ीब अपना, जब देखिए अब वो हैं आईना है शाना है| जिगर मुरादाबादी

  • 1st Jul 2022

    और डूब के जाना है!

    ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है| जिगर मुरादाबादी

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