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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Jul 2022

    तुमने लफ़्ज़ों से बेवफ़ाई की!

    अब तरसते रहो ग़ज़ल के लिए, तुमने लफ़्ज़ों से बेवफ़ाई की| बशीर बद्र

  • 3rd Jul 2022

    तह जमी एक और काई की!

    इक बरस ज़िंदगी का बीत गया, तह जमी एक और काई की| बशीर बद्र

  • 3rd Jul 2022

    कोई सूरत नहीं रिहाई की!

    मैं ही मुल्ज़िम हूँ मैं ही मुंसिफ़ हूँ, कोई सूरत नहीं रिहाई की| बशीर बद्र

  • 3rd Jul 2022

    मेरे हाथ पाँव लफ़्ज़ों के!

    सब मेरे हाथ पाँव लफ़्ज़ों के, और आँखें भी रौशनाई की| बशीर बद्र

  • 3rd Jul 2022

    तुमने क्या मुझ से बेवफ़ाई की!

    मेरे होंठों के फूल सूख गए, तुमने क्या मुझ से बेवफ़ाई की| बशीर बद्र

  • 3rd Jul 2022

    हैसियत क्या मेरी इकाई की!

    अज़्मतें सब तेरी ख़ुदाई की, हैसियत क्या मेरी इकाई की| बशीर बद्र

  • 3rd Jul 2022

    प्रक्रिया

    आज श्री भारत यायावर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| मैं यायावर जी से कभी मिला तो नहीं हूँ परंतु वे मेरे फ़ेसबुक मित्र थे, अक्सर वे अपने मूल्यवान आलेख, कविताएं और संस्मरण शेयर करते रहते थे| उनके साथ कई बार फ़ेसबुक पर कुछ चर्चाओं में भाग लिया काफी अच्छा लगता था| रेणु…

  • 2nd Jul 2022

    मज़ारों पे चादर चढ़ाई हुई!

    ख़ुशी हम ग़रीबों की क्या है मियाँ, मज़ारों पे चादर चढ़ाई हुई | बशीर बद्र

  • 2nd Jul 2022

    बहारों की बेटी पराई हुई!

    उदासी बिछी है बड़ी दूर तक, बहारों की बेटी पराई हुई| बशीर बद्र

  • 2nd Jul 2022

    बड़ी ख़ूबसूरत पढ़ाई हुई!

    वो चेहरा किताबी रहा सामने, बड़ी ख़ूबसूरत पढ़ाई हुई | बशीर बद्र

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