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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Jun 2022

    मुझे कौन उभरने देगा!

    डूब जाने को, जो तक़दीर समझ बैठे हों,ऐसे लोगों में मुझे कौन उभरने देगा| वसीम बरेलवी

  • 27th Jun 2022

    हदें पार न करने देगा!

    प्यार तहज़ीब-ए-तअल्लुक़ का अजब बंधन है,कोई चाहे, तो हदें पार न करने देगा। वसीम बरेलवी

  • 27th Jun 2022

    बुलंदी से तुम्हें कौन उतरने देगा!

    ख़ाक़-ए-पा हो के मिलो, जिससे मिलो, फिर देखो,इस बुलंदी से तुम्हें कौन उतरने देगा। वसीम बरेलवी

  • 27th Jun 2022

    गहराई का अंदाज़ा न करने देगा!

    कैसा दरिया है कि प्यासा तो न मरने देगा,अपनी गहराई का अंदाज़ा न करने देगा| वसीम बरेलवी

  • 27th Jun 2022

    कल रात की तौबा!

    एक पुरानी घटना याद आ गई और उसके साथ ही ये खयाल आया कि दुनिया कितनी बदल गई है| कला की सारी सौगातें, गीत-संगीत तो सब वही हैं लेकिन टेक्नोलॉजी और उसका आम आदमी द्वारा उपयोग कितना बदल गया है, बस यही खयाल आया इस घटना को याद करके| मैं एनटीपीसी में राजभाषा के क्षेत्र…

  • 26th Jun 2022

    मेहमानी भी मेज़बानी भी!

    पास रहना किसी का रात की रात,मेहमानी भी मेज़बानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 26th Jun 2022

    एक अंदाजे-तुर्कमानी भी!

    सर से पा तक सिपुर्दगी की अदा,एक अंदाजे-तुर्कमानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 26th Jun 2022

    याद आयी तेरी जवानी भी!

    दिल में इक हूक भी उठी ऐ दोस्तयाद आयी तेरी जवानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 26th Jun 2022

    कर गये लोग हुक्मरानी भी!

    दिल को आदाबे-बन्दगी भी न आये,कर गये लोग हुक्मरानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 26th Jun 2022

    कहते हैं इक कहानी भी!

    दिले – बदनाम तेरे बारे में,लोग कहते हैं इक कहानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

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