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जितने दूर हुए तुम हमसे!
आज फिर से एक बार मैं अपने अत्यंत प्रिय कवियों में से एक स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूं| रमेश रंजक जी की अनेक रचनाएं मुझे बहुत प्रिय रही हैं और उनसे मुझे बहुत प्रेरणा मिलती थी| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत- जितने दूर…
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कभी मुझसे वो मिला भी है!
ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन,ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है| राहत इन्दौरी
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घर में आईना भी है?
जवाब दे ना सका, और बन गया दुश्मन,सवाल था, के तेरे घर में आईना भी है? राहत इन्दौरी
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ख्वाबों का मसअला भी है!
सवाल नींद का होता तो कोई बात ना थी,हमारे सामने ख्वाबों का मसअला भी है| राहत इन्दौरी
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पत्थर भी है खुदा भी है!
मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ,मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है| राहत इन्दौरी
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भला ही नहीं, बुरा भी है!
जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है,वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है| राहत इन्दौरी