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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Dec 2021

    सोचों में पड़े हुए हैं!

    जा पहुँचा मंज़िल पे ज़माना,हम सोचों में पड़े हुए हैं| राजेश रेड्डी

  • 7th Dec 2021

    अश्क के मोती जड़े हुए हैं!

    जीवन वो ज़ेवर है, जिसमें,अश्क के मोती जड़े हुए हैं| राजेश रेड्डी

  • 7th Dec 2021

    मेरी मुस्कानों के नीचे—

    मेरी मुस्कानों के नीचे,ग़म के खज़ाने गड़े हुए हैं| राजेश रेड्डी

  • 7th Dec 2021

    गुर्बत में बड़े हुए हैं!

    दुख के मुका़बिल खड़े हुए हैं,हम गुर्बत में बड़े हुए हैं| राजेश रेड्डी

  • 7th Dec 2021

    जितने दूर हुए तुम हमसे!

    आज फिर से एक बार मैं अपने अत्यंत प्रिय कवियों में से एक स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूं| रमेश रंजक जी की अनेक रचनाएं मुझे बहुत प्रिय रही हैं और उनसे मुझे बहुत प्रेरणा मिलती थी| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत- जितने दूर…

  • 6th Dec 2021

    कभी मुझसे वो मिला भी है!

    ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन,ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है| राहत इन्दौरी

  • 6th Dec 2021

    घर में आईना भी है?

    जवाब दे ना सका, और बन गया दुश्मन,सवाल था, के तेरे घर में आईना भी है? राहत इन्दौरी

  • 6th Dec 2021

    ख्वाबों का मसअला भी है!

    सवाल नींद का होता तो कोई बात ना थी,हमारे सामने ख्वाबों का मसअला भी है| राहत इन्दौरी

  • 6th Dec 2021

    पत्थर भी है खुदा भी है!

    मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ,मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है| राहत इन्दौरी

  • 6th Dec 2021

    भला ही नहीं, बुरा भी है!

    जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है,वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है| राहत इन्दौरी

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