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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Dec 2021

    आईना अभिशाप है सूने मकान में!

    तस्वीर के लिये भी कोई रूप चाहिये,ये आईना अभिशाप है सूने मकान में। उदय प्रताप सिंह

  • 10th Dec 2021

    आंख में पानी नहीं रहा!

    इन बादलों की आंख में पानी नहीं रहा,तन बेचती है भूख एक मुट्ठी धान में। उदय प्रताप सिंह

  • 10th Dec 2021

    हिंदोस्ताँ कहां है अब!

    ये रोज कोई पूछता है मेरे कान मेंहिंदोस्ताँ कहां है अब हिंदोस्तान में। उदय प्रताप सिंह

  • 10th Dec 2021

    तुमको ही याद किया, तुमको भुलाने के लिए!

    आज मैं स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली साहब की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ | निदा फ़ाज़ली साहब की शायरी में एक सधुक्कड़ी अंदाज़ देखने को मिलता है| मैंने पहले भी निदा साहब की बहुत सी रचनाएं शेयर की हैं, क्या ग़ज़ब की शायरी और दोहे हैं निदा साहब के- ‘मैं रोया परदेस में, भीगा मां…

  • 9th Dec 2021

    राह देखा करेगा!

    राह देखा करेगा सदियों तकछोड़ जाएंगे ये जहां तन्हा। मीना कुमारी (महज़बीं बानो)

  • 9th Dec 2021

    सिमटा-सा एक मकां तन्हा!

    जलती-बुझती-सी रोशनी के परे,सिमटा-सिमटा-सा एक मकां तन्हा| मीना कुमारी (महज़बीं बानो)

  • 9th Dec 2021

    चलते रहें कहां तन्हा!

    हमसफ़र कोई गर मिले भी कभी,दोनों चलते रहें कहां तन्हा| मीना कुमारी (महज़बीं बानो)

  • 9th Dec 2021

    और जां तन्हा!

    ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं,जिस्म तन्हा है और जां तन्हा| मीना कुमारी (महज़बीं बानो)

  • 9th Dec 2021

    बुझ गई आस, छुप गया तारा!

    बुझ गई आस, छुप गया तारा,थरथराता रहा धुआं तन्हा| मीना कुमारी (महज़बीं बानो)

  • 9th Dec 2021

    कहां-कहां तन्हा!

    चांद तन्हा है आसमां तन्हा,दिल मिला है कहां-कहां तन्हा| मीना कुमारी (महज़बीं बानो)

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