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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Oct 2025

    तड़पती हैं तमन्नाएँ!

    तड़पती हैं तमन्नाएँ किसी आराम से पहले,लुटा होगा न यूँ कोई दिल-ए-नाकाम से पहले| क़तील शिफ़ाई

  • 28th Oct 2025

    कर दे न अँधेरा कोई!

    दरकार उजाला है मगर सहमे हुए हैं,कर दे न अँधेरा कोई बारूद जला कर| क़तील शिफ़ाई

  • 28th Oct 2025

    इक मौज दबे पाँव!

    इक मौज दबे पाँव तआ’क़ुब में* चली आई,हम ख़ुश थे बहुत रेत की दीवार बना कर|*पीछे से क़तील शिफ़ाई

  • 28th Oct 2025

    तू न जिया न मरा – स्व. प्रेम शर्मा जी का गीत

    आज एक बार मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से स्वर्गीय प्रेम शर्मा जी का एक गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, गीत के बोल हैं- ‘तू न जिया न मरा, ज्यों कांटे पर मछली, प्राणों में दर्द पिरा’ आशा है आपको पसंद आएगा।धन्यवाद

  • 28th Oct 2025

    हम लाए हैं घर में!

    डर है कि न ले जाए वो हम को भी चुरा कर,हम लाए हैं घर में जिसे मेहमान बना कर| क़तील शिफ़ाई

  • 28th Oct 2025

    लूटा है सदा जिसने!

    लूटा है सदा जिस ने हमें दोस्त बना कर, हम ख़ुश हैं उसी शख़्स से फिर हाथ मिला कर| क़तील शिफ़ाई

  • 28th Oct 2025

    क्यों जागा करते हो कविवर!

    प्रस्तुत है आज की रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- क्यों जागा करते हो कविवरखोज रहे हो क्या रातों में! केवल छत को देख सकोगेलेट पलंग पर कमरे में तुमबहुमंज़िला इमारत है यहइधर हुआ है चंदा भी गुम, छिटपुट तारे देख उन्हेंक्या उलझाओगे बातों में। ये दुनिया का मेला भ्रम हैकिसे यहाँ संतोष मिलेगा,भाग्यवान वह…

  • 27th Oct 2025

    दस्तार जिन्हें दी है!

    शर्मिंदा उन्हें और भी ऐ मेरे ख़ुदा कर,दस्तार जिन्हें दी है उन्हें सर भी अता कर| क़तील शिफ़ाई

  • 27th Oct 2025

    सितम ये है मैं!

    सितम ये है मैं उस रस्ते पे नंगे पैर चलता हूँ,जहाँ चलते हुए लोगों के जूते टूट जाते है| वसीम नादिर

  • 27th Oct 2025

    ज़ियादा कामयाबी भी!

    ज़ियादा कामयाबी भी बहुत नुक़सान देती है,फलों का बोझ बढ़ने से भी पौदे टूट जाते है| वसीम नादिर

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