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मेरी सदा हवा में!
मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गई,पर मैं बुला रहा था जिसे बे-ख़बर रहा| मुनीर नियाज़ी
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दिल जल रहा था!
दिल जल रहा था ग़म से मगर नग़्मा-गर रहा,जब तक रहा मैं साथ मिरे ये हुनर रहा| मुनीर नियाज़ी
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मेरे नाम से पहले!
सुनेगा जब ज़माना मेरी बर्बादी के अफ़्साने,तुम्हारा नाम भी आएगा मेरे नाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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गुज़रा ज़माना बचपन का!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज एक बार फिर मैं मुकेश जी का गाया बहुत प्यारा गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, गीत के बोल हैं- गुज़रा बचपन का, आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद ।
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सितारे शाम से पहले!
न जाने क्यूँ हमें इस दम तुम्हारी याद आती है,जब आँखों में चमकते हैं सितारे शाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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उँगलियाँ थाम के खुद!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि, नवगीतकार तथा मेरे लिए गुरुतुल्य रहे स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। बेचैन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की यह ग़ज़ल – उँगलियाँ थाम के खुद चलना सिखाया था जिसेराह में…
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कोहराम से पहले!
कोई कैसे करे दिल में छुपे तूफ़ाँ का अंदाज़ा,सुकूत-ए-मर्ग* छाया है किसी कोहराम से पहले|*सन्नाटा क़तील शिफ़ाई
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कोई आवाज़ आई थी!
गिरा है टूट कर शायद मिरी तक़दीर का तारा,कोई आवाज़ आई थी शिकस्त-ए-जाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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कोई गर्दिश नहीं थी!
ये आलम देख कर तू ने भी आँखें फेर लीं वर्ना,कोई गर्दिश नहीं थी गर्दिश-ए-अय्याम से पहले| क़तील शिफ़ाई