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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Jan 2022

    मेरा हमनवा कर दे!

    अकेली शाम बहुत जी उदास करती है,किसी को भेज कोई मेरा हमनवा कर दे| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    उसे हवा कर दे!

    मैं उस के जोर को देखूँ वो मेरा सब्र-ओ-सुकूँ,मुझे चराग़ बना दे उसे हवा कर दे| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    रस्ता हरा भरा कर दे!

    ये रेत्ज़ार कहीं ख़त्म ही नहीं होता,ज़रा सी दूर तो रस्ता हरा भरा कर दे| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    उसे मेरा कर दे!

    है इख़्तियार में तेरे तो मोजेज़ा कर दे,वो शख़्स मेरा नहीं है उसे मेरा कर दे| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    मरहम की तरह!

    कैसे हमदर्द हो तुम कैसी मसीहाई है,दिल पे नश्तर भी लगाते हो तो मरहम की तरह| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    तेरी याद को शबनम की तरह!

    मैंने ख़ुशबू की तरह तुझ को किया है महसूस,दिल ने छेड़ा है तेरी याद को शबनम की तरह| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    मोहर्रम की तरह!

    मेरे महबूब मेरे प्यार को इल्ज़ाम न दे,हिज्र में ईद मनाई है मोहर्रम की तरह| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    बदलते हुए मौसम की तरह!

    कभी ग़ुंचा कभी शोला कभी शबनम की तरह,लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    देखेगा कौन?

    हिन्दी नवगीत आंदोलन के प्रणेता स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी, हिन्दी गीत साहित्य में अपने योगदान के लिए हमेशा याद किए जाएंगे| आज मैं स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूं- बगिया में नाचेगा मोर,देखेगा कौन?तुम बिन ओ मेरे चितचोर,देखेगा कौन? नदिया का यह नीला जल, रेतीला घाट,झाऊ की झुरमुट के बीच,…

  • 22nd Jan 2022

    अच्छी-सी जगह ढूंढ रहे हैं!

    ईमां की तिजारत के लिए इन दिनों हम भी,बाज़ार में अच्छी-सी जगह ढूंढ रहे हैं| राजेश रेड्डी

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