Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 16th Aug 2022

    मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता!

    ये क्यूँ बाक़ी रहे आतिश-ज़नो ये भी जला डालो, कि सब बे-घर हों और मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर

  • 16th Aug 2022

    अब शजर अच्छा नहीं लगता!

    बुलंदी पर उन्हें मिट्टी की ख़ुश्बू तक नहीं आती, ये वो शाख़ें हैं जिनको अब शजर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर

  • 16th Aug 2022

    क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता!

    मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है, किसी का भी हो सर, क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर

  • 16th Aug 2022

    मगर अच्छा नहीं लगता!

    ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना, हामी भर लेना, बहुत हैं फ़ाएदे इसमें मगर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर

  • 16th Aug 2022

    रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता!

    जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता, मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर

  • 16th Aug 2022

    सड़क!

    एक बार फिर से मैं आज श्री रामदरश मिश्र जी की एक लंबी रचना शेयर कर रहा हूँ| इस कविता में सड़क कवि को ज़िंदगी के किन मुहानों पर ले जाती है, यह महसूस करने लायक है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता – सड़क ने कहा-‘‘चलोगे ?’’‘‘कहाँ ?’’‘‘दायरे से…

  • 15th Aug 2022

    आज की दास्ताँ हमारी है!

    कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था, आज की दास्ताँ हमारी है| गुलज़ार

  • 15th Aug 2022

    चुप सी चमन पे तारी है!

    शाख़ पर कोई क़हक़हा तो खिले, कैसी चुप सी चमन पे तारी है| गुलज़ार

  • 15th Aug 2022

    चादर अभी उतारी है!

    रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो, दिन की चादर अभी उतारी है| गुलज़ार

  • 15th Aug 2022

    आपके साथ ही गुज़ारी है!

    आपके बाद हर घड़ी हमने, आपके साथ ही गुज़ारी है| गुलज़ार

←Previous Page
1 … 1,167 1,168 1,169 1,170 1,171 … 1,527
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar