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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Aug 2022

    बर्क़ अभी गिरी नहीं है!

    भूखों की निगाह में है बिजली, ये बर्क़ अभी गिरी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 18th Aug 2022

    ये शेवा-ए-दिलबरी नहीं है!

    आशिक़-कुशी ओ फ़रेब-कारी, ये शेवा-ए-दिलबरी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 18th Aug 2022

    वो तिश्नगी तिश्नगी नहीं है!

    साक़ी से जो जाम ले न बढ़कर, वो तिश्नगी तिश्नगी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 18th Aug 2022

    जी लेना तो ज़िंदगी नहीं है!

    है और ही कारोबार-ए-मस्ती, जी लेना तो ज़िंदगी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 18th Aug 2022

    तख़्लीक़-ए-जुनूँ रुकी नहीं है!

    वीरानों से आ रही है आवाज़, तख़्लीक़-ए-जुनूँ रुकी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 18th Aug 2022

    रात है जो कटी नहीं है!

    इक सुब्ह है जो हुई नहीं है, इक रात है जो कटी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 18th Aug 2022

    एक सूनी नाव!

    आज एक बार फिर मैं अपने समय के लोकप्रिय कवि स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक छोटी सी परंतु अति सुंदर कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की अनेक कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता – एक सूनी नावतट पर लौट…

  • 17th Aug 2022

    सारे रास्तों की याद बचपन में!

    लिपट जाती है सारे रास्तों की याद बचपन में, जिधर से भी गुज़रता हूँ मैं रस्ता याद रहता है| मुनव्वर राना

  • 17th Aug 2022

    परिंदा तो वही होता है-

    अगर सोने के पिंजड़े में भी रहता है तो क़ैदी है, परिंदा तो वही होता है जो आज़ाद रहता है| मुनव्वर राना

  • 17th Aug 2022

    इसलिए बरबाद रहता है!

    भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है, मोहब्बत करने वाला इसलिए बरबाद रहता है| मुनव्वर राना

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