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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Aug 2022

    नहीं हो तो बुझ जाना चाहिए!

    बिजली का क़ुमक़ुमा न हो काला धुआँ तो हो, ये भी अगर नहीं हो तो बुझ जाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Aug 2022

    कोई दीवाना चाहिए!

    चुप चुप मकान रास्ते गुम-सुम निढाल वक़्त, इस शहर के लिए कोई दीवाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Aug 2022

    भटक जाना चाहिए!

    अपनी तलाश अपनी नज़र अपना तजरबा, रस्ता हो चाहे साफ़ भटक जाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Aug 2022

    लोगों से याराना चाहिए!

    चौराहे बाग़ बिल्डिंगें सब शहर तो नहीं, कुछ ऐसे वैसे लोगों से याराना चाहिए| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Aug 2022

    घटा को बरस जाना चाहिए!

    झुकती हुई नज़र हो कि सिमटा हुआ बदन, हर रस-भरी घटा को बरस जाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Aug 2022

    ख़ुद से उलझ जाना चाहिए!

    यूँ तो क़दम क़दम पे है दीवार सामने, कोई न हो तो ख़ुद से उलझ जाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Aug 2022

    जिए जाना चाहिए!

    दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए, जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Aug 2022

    मंदिर!

    लंबे समय के बाद आज फिर से मैं छायावाद युग के प्रमुख कवि स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| प्रसाद जी की अनेक रचनाएं राष्ट्र की धरोहर हैं| इस कविता में ईश्वर के प्रति, आस्था के प्रति प्रश्न उठाने वाले लोगों को प्रसाद जी ने समुचित उत्तर दिया है, भले…

  • 18th Aug 2022

    वो आँख अभी उठी नहीं है!

    इक धूप सी है जो ज़ेर-ए-मिज़्गाँ, वो आँख अभी उठी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 18th Aug 2022

    शम-ए-तरब बुझी नहीं है!

    दिल में जो जलाई थी किसी ने, वो शम-ए-तरब* बुझी नहीं है|*Lamp Of Joy अली सरदार जाफ़री

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