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खुल जाओ किसी दिन!
राज़ों की तरह उतरो मिरे दिल में किसी शब, दस्तक पे मिरे हाथ की खुल जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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बरस जाओ किसी दिन!
चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन, क्या रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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कुछ चीज़ें होती हैं जो!
आज फिर से अज्ञेय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, अज्ञेय जी प्रयोगवाद और उसके बाद नई कविता के द्वार खोलने वाले प्रमुख कवि थे, साहित्य की सभी विधाओं में उनका प्रमुख योगदान था, उनका उपन्यास ‘शेखर एक जीवनी’ अदभुद था|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन जी की यह कविता, जिनको…
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मिसाल में मिला मुझे!
तमाम इल्म ज़ीस्त का गुज़िश्तगाँ से ही हुआ, अमल गुज़िश्ता दौर का मिसाल में मिला मुझे| मुनीर नियाज़ी
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वो मलाल में मिला मुझे!
गया तो इस तरह गया कि मुद्दतों नहीं मिला, मिला जो फिर तो यूँ कि वो मलाल में मिला मुझे| मुनीर नियाज़ी