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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Jan 2022

    तो देखे केवल मन!

    न उम्र की सीमा हो,न जनम का हो बंधन|जब प्यार करे कोई,तो देखे केवल मन|नई रीत चलाकर तुम,ये रीत अमर कर दो|होंठों से छूलो तुम … इंदीवर

  • 28th Jan 2022

    प्रीत अमर कर दो!

    होंठों से छू लो तुम,मेरा गीत अमर कर दो|बन जाओ मीत मेरे,मेरी प्रीत अमर कर दो| इंदीवर

  • 28th Jan 2022

    प्रसाद जी की रचना ‘आंसू’ का अंश

    छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ – स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी का साहित्य, हिन्दी काव्य जगत की एक अमूल्य धरोहर है| आज मैं प्रसाद जी के प्रमुख काव्य-ग्रंथ- ‘आँसू’ का प्रारंभिक अंश आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है प्रसाद जी की काव्य-रचना ‘आँसू’ का यह अंश – इस करुणा कलित…

  • 27th Jan 2022

    जाम ही मांगना छोड़ दे!

    तेरी आँखों से छलकी हुई, जो भी इक बार पी ले अगर,फिर वो मैख़ार ऐ साक़िया, जाम ही मांगना छोड़ दे| हसन काज़मी

  • 27th Jan 2022

    किस तरह खेलना छोड़ दे!

    तेरी अंगड़ाइयों से मिली, ज़ेहन-ओ- दिल को नई रोशनी,तेरे जलवों से मेरी नज़र, किस तरह खेलना छोड़ दे| हसन काज़मी

  • 27th Jan 2022

    मोरनी नाचना छोड़ दे!

    तेरी आँखों से कलियां खिलीं, तेरे आँचल से बादल उड़े,देख ले जो तेरी चाल को, मोरनी नाचना छोड़ दे| हसन काज़मी

  • 27th Jan 2022

    तू मुझे सोचना छोड़ दे!

    खूबसूरत हैं आँखे तेरी, रात को जागना छोड़ दे,खुद ब खुद नींद आ जायेगी, तू मुझे सोचना छोड़ दे| हसन काज़मी

  • 27th Jan 2022

    लहजे को भी बाज़ारी रखो!

    ले तो आए शाइरी बाज़ार में ‘राहत’ मियां,क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो| राहत इन्दौरी

  • 27th Jan 2022

    न मैं चुप हूँ न गाता हूँ !

    आज बिना किसी भूमिका के, हमारे लोकप्रिय पूर्व प्रधान मंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी एक सहृदय मनुष्य और मंजे हुए राजनेता होने के साथ ही एक श्रेष्ठ कवि भी थे| लीजिए प्रस्तुत है वाजपेयी जी की एक कविता, जो मनाली…

  • 26th Jan 2022

    पत्थर ज़रा भारी रखो!

    ये हवाएं उड़ न जाएं ले के काग़ज़ का बदन,दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो| राहत इन्दौरी

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