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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Feb 2022

    बनते हैं अंजाने बहुत!

    क्या तग़ाफ़ुल का अजब अन्दाज़ है,जानकर बनते हैं अंजाने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’

  • 22nd Feb 2022

    हैं वरना मयखाने बहुत!

    साक़िया हम को मुरव्वत चाहिए,शहर में हैं वरना मयखाने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’

  • 22nd Feb 2022

    मुझको समझाने बहुत!

    आ रहे हैं मुझको समझाने बहुत,अक़्ल वाले कम हैं, दीवाने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’

  • 22nd Feb 2022

    मज़ा चखा के ही माना हूँ!

    मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को, समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी

  • 22nd Feb 2022

    सखि वसन्त आया!

    हिन्दी काव्य के गौरव और छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| ऐसा भी माना जाता है कि निराला जी के काव्य में कविता के आने वाले दौर के, नवगीत के भी अंकुर शामिल थे| निराला जी ने कविता में बहुत प्रयोग किए और…

  • 21st Feb 2022

    पसीने बांटता फिरता है!

    पसीने बांटता फिरता है हर तरफ़ सूरज, कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी

  • 21st Feb 2022

    मैं तोड़ फोड़ दूंगा उसे!

    बदन चुरा के वो चलता है मुझसे शीशा-बदन, उसे ये डर है कि मैं तोड़ फोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी

  • 21st Feb 2022

    ये कमाल है उसका!

    मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उसका, इरादा मैंने किया था कि छोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी

  • 21st Feb 2022

    जोड़ दूंगा उसे!

    कहीं अकेले में मिलकर झिंझोड़ दूँगा उसे, जहां जहां से वो टूटा है जोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी

  • 21st Feb 2022

    कलम आज उनकी जय बोल!

    आज मैं राष्ट्रप्रेम और ओज के कवि, स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों को नमन किया है| दिनकर जी ने जहां ‘मेरे नगपति, मेरे विशाल’ जैसी पंक्तियाँ लिखीं वहीं उन्होंने ‘उर्वशी’ जैसी महान रचना भी लिखी, जो…

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