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बनते हैं अंजाने बहुत!
क्या तग़ाफ़ुल का अजब अन्दाज़ है,जानकर बनते हैं अंजाने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’
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मुझको समझाने बहुत!
आ रहे हैं मुझको समझाने बहुत,अक़्ल वाले कम हैं, दीवाने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’
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मज़ा चखा के ही माना हूँ!
मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को, समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी
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सखि वसन्त आया!
हिन्दी काव्य के गौरव और छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| ऐसा भी माना जाता है कि निराला जी के काव्य में कविता के आने वाले दौर के, नवगीत के भी अंकुर शामिल थे| निराला जी ने कविता में बहुत प्रयोग किए और…
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पसीने बांटता फिरता है!
पसीने बांटता फिरता है हर तरफ़ सूरज, कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी
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मैं तोड़ फोड़ दूंगा उसे!
बदन चुरा के वो चलता है मुझसे शीशा-बदन, उसे ये डर है कि मैं तोड़ फोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी
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ये कमाल है उसका!
मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उसका, इरादा मैंने किया था कि छोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी
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जोड़ दूंगा उसे!
कहीं अकेले में मिलकर झिंझोड़ दूँगा उसे, जहां जहां से वो टूटा है जोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी
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कलम आज उनकी जय बोल!
आज मैं राष्ट्रप्रेम और ओज के कवि, स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों को नमन किया है| दिनकर जी ने जहां ‘मेरे नगपति, मेरे विशाल’ जैसी पंक्तियाँ लिखीं वहीं उन्होंने ‘उर्वशी’ जैसी महान रचना भी लिखी, जो…