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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Feb 2022

    मेरा दिल ही दुखाने आई!

    तेरी मानिंद तेरी याद भी ज़ालिम निकली,जब भी आई है मेरा दिल ही दुखाने आई| कैफ़ भोपाली

  • 23rd Feb 2022

    इक आवाज़ बुलाने आई!

    मैंने जब पहले-पहल अपना वतन छोड़ा था,दूर तक मुझको इक आवाज़ बुलाने आई| कैफ़ भोपाली

  • 23rd Feb 2022

    खुशबू ये मुझे मेरे सिरहाने आई!

    दिल में आहट सी हुई रूह में दस्तक गूँजी,किसकी खुशबू ये मुझे मेरे सिरहाने आई| ‘कैफ़’ भोपाली

  • 23rd Feb 2022

    कुछ अक्ल ठिकाने आई!

    आजकल फिर दिल-ए-बर्बाद की बातें है वही,हम तो समझे थे के कुछ अक्ल ठिकाने आई| ‘कैफ़’ भोपाली

  • 23rd Feb 2022

    मौत बचाने आई!

    ज़िंदगी बाप की मानिंद सजा देती है,रहम-दिल माँ की तरह मौत बचाने आई| ‘कैफ़’ भोपाली

  • 23rd Feb 2022

    मेरी तनहाई चुराने आई!

    दर ओ दीवार पे शकलें सी बनाने आई,फिर ये बारिश मेरी तनहाई चुराने आई| ‘कैफ़’ भोपाली

  • 23rd Feb 2022

    मेरे साजन हैं उस पार!

    फिल्म- ‘बंदिनी’ के लिए शैलेन्द्र जी का लिखा एक प्रसिद्ध गीत आज शेयर कर रहा हूँ जिसे नूतन जी और अशोक कुमार जी पर फिल्माया गया था| शैलेन्द्र जी के लिखे इस भाव भरे गीत के लिए संगीत और स्वयं अपना स्वर दिया था स्वर्गीय सचिन देव बर्मन जी ने| बर्मन दा के स्वर में…

  • 22nd Feb 2022

    ये दयार-ए-इश्क़ है!

    ये दयार-ए-इश्क़ है इसमें सहर,बस्तियाँ कम कम हैं वीराने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’

  • 22nd Feb 2022

    देने हैं नज़राने बहुत!

    ये जिगर, ये दिल, ये नींदें, ये क़रार,इश्क़ में देने हैं नज़राने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’

  • 22nd Feb 2022

    हक़ीक़त के हैं अफ़साने बहुत!

    ये हक़ीक़त है कि मुझको प्यार है,इस हक़ीक़त के हैं अफ़साने बहुत| महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’

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