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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Mar 2022

    हमारा झुकाव ऐसा था!

    फिर उसके बाद झुके तो झुके ख़ुदा की तरफ़,तुम्हारी सम्त हमारा झुकाव ऐसा था| कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 21st Mar 2022

    बहाव ऐसा था!

    कोई ठहर न सका मौत के समन्दर तक,हयात ऐसी नदी थी, बहाव ऐसा था| कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 21st Mar 2022

    खरे सोने का भाव ऐसा था!

    ख़रीदते तो ख़रीदार ख़ुद ही बिक जाते,तपे हुए खरे सोने का भाव ऐसा था| कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 21st Mar 2022

    चारों तरफ से दबाव ऐसा था!

    कुछ ऐसी साँसें भी लेनी पड़ीं जो बोझल थीं,हवा का चारों तरफ से दबाव ऐसा था| कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 21st Mar 2022

    रख-रखाव ऐसा था!

    तमाम जिस्म ही घायल था, घाव ऐसा था,कोई न जान सका, रख-रखाव ऐसा था| कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 21st Mar 2022

    प्यास के क्षण मांगता हूँ!

    आज मैं श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी गिनती हिन्दी के श्रेष्ठ कवियों में होती है| आपने बहुत से सुंदर गीतों और ग़ज़लों की सौगात हमें दी है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत जिसमें कवि ने कुछ अलग ही तरह की अभिलाषा अपने…

  • 20th Mar 2022

    मुँह मत लगाया करो!

    चांद सूरज कहाँ, अपनी मंज़िल कहाँ,ऐसे वैसों को मुँह मत लगाया करो| राहत इन्दौरी

  • 20th Mar 2022

    अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बांधकर!

    अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बांधकर,आसमानों का ज़र्फ़ आज़माया करो| राहत इन्दौरी

  • 20th Mar 2022

    फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो!

    शाम के बाद जब तुम सहर देख लो,कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो| राहत इन्दौरी

  • 20th Mar 2022

    पत्तियों को चबाया करो!

    दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर,नीम की पत्तियों को चबाया करो| राहत इन्दौरी

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