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जिससे अपनी पीर कहूँ मैं!
आज मैं एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ, जो मेरे अत्यंत प्रिय कवि से संबंधित है|लीजिए फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय गीत कवि स्व. भारत भूषण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। कविता, गीत आदि स्वयं अपनी बात कहते हैं और जितना ज्यादा प्रभावी रूप से कहते हैं, वही…
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न याद आ कि तुझे भूल जाएँ हम!
इस ज़िंदगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब, इतना न याद आ कि तुझे भूल जाएँ हम| अहमद फ़राज़
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आप ही अपनी सदाएँ हम!
सहरा-ए-ज़िंदगी में कोई दूसरा न था, सुनते रहे हैं आप ही अपनी सदाएँ हम| अहमद फ़राज़