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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Oct 2022

    तुझको अगर भूल जाएँ हम!

    अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएँ हम, ये भी बहुत है तुझको अगर भूल जाएँ हम| अहमद फ़राज़

  • 1st Oct 2022

    मेरी तरह तुझको भी तन्हा रक्खे!

    हँस न इतना भी फ़क़ीरों के अकेले-पन पर, जा ख़ुदा मेरी तरह तुझको भी तन्हा रक्खे| अहमद फ़राज़

  • 1st Oct 2022

    और का होने दे न अपना रक्खे!

    दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्ता है, जो किसी और का होने दे न अपना रक्खे| अहमद फ़राज़

  • 1st Oct 2022

    तो फिर नाम भी तुझ सा रक्खे!

    हमको अच्छा नहीं लगता कोई हमनाम तिरा, कोई तुझ सा हो तो फिर नाम भी तुझ सा रक्खे| अहमद फ़राज़

  • 1st Oct 2022

    जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे!

    उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना, ऐ मिरी जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे| अहमद फ़राज़

  • 1st Oct 2022

    वो किसे प्यासा रक्खे!

    हर कोई दिल की हथेली पे है सहरा रक्खे, किसको सैराब करे वो किसे प्यासा रक्खे| अहमद फ़राज़

  • 1st Oct 2022

    याद का आसरा!

    आज एक बार फिर मैं स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| ‘नंदन’ जी एक श्रेष्ठ कवि और बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका के संपादक थे| पहले भी मैंने नंदन जी की कुछ रचनाएं शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का यह सुंदर गीत– तेरी याद का…

  • 30th Sep 2022

    मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले!

    बेलचे लाओ खोलो ज़मीं की तहें, मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले| कैफ़ी आज़मी

  • 30th Sep 2022

    हुनर तुम सिखा तो चले!

    उसको मज़हब कहो या सियासत कहो, ख़ुदकुशी का हुनर तुम सिखा तो चले| कैफ़ी आज़मी

  • 30th Sep 2022

    मयकदा तो चले!

    हाकिम-ए-शहर ये भी कोई शहर है, मस्जिदें बंद हैं मयकदा तो चले| कैफ़ी आज़मी

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