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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th May 2022

    सुनाई नहीं जाने वाली!

    चीख़ निकली तो है होंठों से मगर मद्धम है,बंद कमरों को सुनाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार

  • 14th May 2022

    ये खाई नहीं जाने वाली!

    एक तालाब-सी भर जाती है हर बारिश में,मैं समझता हूँ ये खाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार

  • 14th May 2022

    बुझाई नहीं जाने वाली!

    कितना अच्छा है कि साँसों की हवा लगती है,आग अब उनसे बुझाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार

  • 14th May 2022

    ख़तरनाक सच्चाई नहीं जाने वाली!

    देख, दहलीज़ से काई नहीं जाने वाली,ये ख़तरनाक सच्चाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार

  • 14th May 2022

    कलम सरकंडे की!

    श्री रामदरश मिश्र जी हिन्दी के उन श्रेष्ठ श्रेष्ठ रचनाकारों में से एक हैं, जिन्होंने कविता, कहानी और उपन्यास सभी क्षेत्रों में अपनी रचनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान किया है| लीजिए आज प्रस्तुत है, श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता जो कविधर्म की ओर बड़े सधे और शालीन ढंग से स्पष्ट संकेत करती…

  • 13th May 2022

    आकाश-सी छाती तो है!

    दुख नहीं कोई कि अब उपलब्धियों के नाम पर,और कुछ हो या न हो, आकाश-सी छाती तो है| दुष्यंत कुमार

  • 13th May 2022

    जा के बतियाती तो है!

    निर्वसन मैदान में लेटी हुई है जो नदी,पत्थरों से ओट में जा-जा के बतियाती तो है| दुष्यंत कुमार

  • 13th May 2022

    उस भोर तक जाती तो है!

    एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी,यह अँधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है| दुष्यंत कुमार

  • 13th May 2022

    गूँगी ही सही, गाती तो है!

    एक खँडहर के हृदय-सी,एक जंगली फूल-सी,आदमी की पीर गूँगी ही सही, गाती तो है| दुष्यंत कुमार

  • 13th May 2022

    भीगी हुई बाती तो है!

    एक चिंगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तो,इस दिये में तेल से भीगी हुई बाती तो है| दुष्यंत कुमार

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