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आँख में कितने चेनाब रखते हैं!
जहान-ए-इश्क़ में सोहनी कहीं दिखाई दे,हम अपनी आँख में कितने चेनाब रखते हैं| हसरत जयपुरी
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दिल की कुछ ऐसी किताब रखते हैं!
हर एक वर्क़ में तुम ही तुम हो जान-ए-महबूबी,हम अपने दिल की कुछ ऐसी किताब रखते हैं| हसरत जयपुरी
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होठों पे खिलते गुलाब रखते हैं!
वो पास बैठें तो आती है दिलरुबा ख़ुश्बू,वो अपने होठों पे खिलते गुलाब रखते हैं| हसरत जयपुरी
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चेहरे में सौ आफ़ताब रखते हैं!
वो अपने चेहरे में सौ आफ़ताब रखते हैं,इसीलिये तो वो रुख़ पे नक़ाब रखते हैं| हसरत जयपुरी
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काँटे सभी बोतें हैं!
होता चला आया है बेदर्द ज़माने में,सच्चाई की राहों में काँटे सभी बोतें हैं| हसरत जयपुरी
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पलकों में मोती से पिरोते हैं!
हम अश्क जुदाई के गिरने ही नहीं देते,बेचैन सी पलकों में मोती से पिरोते हैं| हसरत जयपुरी
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इस मौसम में!
एक बार फिर से मैं आज पटनावासी श्रेष्ठ कवि जो मेरे आदरणीय मित्र होने के अलावा अभिनेता एवं नेता श्री शत्रुघ्न सिन्हा जी के भी मित्र और पड़ौसी हैं, ऐसे श्री सत्यनारायण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| वे कवि सम्मेलनों का श्रेष्ठ और गरिमापूर्ण संचालन तो करते ही हैं, मुझे याद आता…