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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Jun 2022

    फूल चट्टान पर खिला देखा!

    संगदिल को हमारी याद आई,फूल चट्टान पर खिला देखा। नक़्श लायलपुरी

  • 9th Jun 2022

    सुनहरी नाव!

    आज बारी है एक पुरानी पोस्ट को दोहराने की, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया…

  • 5th Jun 2022

    आँसुओं में लहू छुपा देखा!

    ज़ख़्मे-दिल आ गया है आँखों तक,आँसुओं में लहू छुपा देखा। नक़्श लायलपुरी

  • 5th Jun 2022

    शहरे-जाँ में क्या देखा!

    एक हंगामा सा बरपा देखा।क्या कहें शहरे-जाँ में क्या देखा। नक़्श लायलपुरी

  • 5th Jun 2022

    कर लिया ख़ुद को तमाशा आपने!

    ’नक़्श’ साहब देखिए सच बोल कर,कर लिया ख़ुद को तमाशा आपने। नक़्श लायलपुरी

  • 5th Jun 2022

    चेहरे पर लिखा था ग़म मेरा!

    मेरे चेहरे पर लिखा था ग़म मेरा,देख कर भी कुछ न देखा आपने। नक़्श लायलपुरी

  • 5th Jun 2022

    किस पर भरोसा आपने!

    दिल करेगा रहनुमाई आपकी ?कर लिया किस पर भरोसा आपने। नक़्श लायलपुरी

  • 5th Jun 2022

    आँखों में शायद थी नमी!

    आपकी आँखों में शायद थी नमी,मेरी आँखों में भी झाँका आपने। नक़्श लायलपुरी

  • 5th Jun 2022

    मेरी आँखों पे ही क्यों ये तोहमतें !

    मेरी आँखों पे ही क्यों ये तोहमतें,अपने बारे में भी सोचा आपने। नक़्श लायलपुरी

  • 5th Jun 2022

    माज़ी फिर कुरेदा आपने!

    मेरा माज़ी फिर कुरेदा आपने।कर दिया हर ज़ख़्म ताज़ा आपने। नक़्श लायलपुरी

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