Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 16th Jun 2022

    याद तुझको दिलाएं तेरा पैमां जाना!

    आज प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट| भारतीय उपमहाद्वीप में उर्दू के जो सर्वश्रेष्ठ शायर हुए हैं, उनमें से एक रहे हैं जनाब अहमद फराज़, वैसे तो श्रेष्ठ कवियों/शायरों के लिए सीमाओं का कोई महत्व नहीं होता, लेकिन यह बता दूँ कि फराज़ साहब पाकिस्तान में थे और उनमें इतना साहस था कि उन्होंने वहाँ…

  • 15th Jun 2022

    मन तुम्हारे गीत गाना चाहता है!

    काफी लंबे अंतराल के बाद मैं आज फिर से स्वर्गीय बलबीर सिंह जी ‘रंग’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंग जी अपनी तरह के एक अनूठे कवि थे और अपनी कविताओं और प्रस्तुति के अंदाज़ के कारण उन्होंने काव्य मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई थी| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह जी…

  • 14th Jun 2022

    पहली सी नहीं, कुछ कम है!

    आज भी है तेरी दूरी ही उदासी का सबब,यह अलग बात कि पहली सी नहीं, कुछ कम है| शहरयार

  • 14th Jun 2022

    ज़्यादा है, कहीं कुछ कम है!

    अब जिधर देखिए लगता है कि इस दुनिया में,कहीं कुछ ज़्यादा है, कहीं कुछ कम है| शहरयार

  • 14th Jun 2022

    यकीं कुछ कम है!

    बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फिर होगी,दिल में उम्मीद तो काफी है, यकीं कुछ कम है| शहरयार

  • 14th Jun 2022

    ये ज़मीं कुछ कम है!

    घर की तामीर तसव्वुर ही में हो सकती है,अपने नक्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है| शहरयार

  • 14th Jun 2022

    अहसास कहीं कुछ कम है!

    ज़िंदगी जैसी तवक्को थी नहीं, कुछ कम है,हर घड़ी होता है अहसास कहीं कुछ कम है| शहरयार

  • 14th Jun 2022

    काट लो रस्ता यही बेहतर!

    आज एक बार फिर मैं अपने अत्यंत प्रिय नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूं| रंजक जी की अनेक रचनाएं मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनको साक्षात सुनने के अनेक अवसर मिले, उनसे प्रशंसा भी प्राप्त की और लंबे समय तक उनसे गीत…

  • 13th Jun 2022

    कुछ दूर माहताब के साथ!

    ज़मीन तेरी कशिश खींचती रही हमको,गए ज़रूर थे कुछ दूर माहताब के साथ| शहरयार

  • 13th Jun 2022

    दूर तलक मरहबा के नारे हैं!

    फ़िज़ा में दूर तलक मरहबा के नारे हैं,गुज़रने वाले हैं कुछ लोग याँ से ख़्वाब के साथ| शहरयार

←Previous Page
1 … 1,068 1,069 1,070 1,071 1,072 … 1,383
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar