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बैठा रहूँ मैं गिरफ्तार सा!
खूबसूरत सी पैरों में ज़ंजीर हो,घर में बैठा रहूँ मैं गिरफ्तार सा| बशीर बद्र
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इस पार, प्रिये मधु है तुम हो!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के गीत शिरोमणि स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक प्रसिद्ध रचना शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी के इस गीत की मुख्य पंक्ति को अक्सर उद्धृत किया जाता है, इसलिए मुझे लगता है कि इसके संबंध में अधिक बताने की आवश्यकता नहीं है| लीजिए प्रस्तुत है बच्चन जी…