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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Dec 2022

    इक तमन्ना सताती रही रात भर!

    एक उम्मीद से दिल बहलता रहा, इक तमन्ना सताती रही रात भर| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 7th Dec 2022

    हर सदा पर बुलाती रही रात भर!

    जो न आया उसे कोई ज़ंजीर-ए-दर, हर सदा पर बुलाती रही रात भर| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 7th Dec 2022

    कोई तस्वीर गाती रही रात भर!

    कोई ख़ुशबू बदलती रही पैरहन, कोई तस्वीर गाती रही रात भर| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 7th Dec 2022

    चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर!

    आप की याद आती रही रात भर, चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 7th Dec 2022

    ‘फ़ैज़’ ग़ज़ल इब्तिदा करो!

    भीगी है रात ‘फ़ैज़’ ग़ज़ल इब्तिदा करो, वक़्त-ए-सरोद दर्द का हंगाम ही तो है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 7th Dec 2022

    एक रोज़ करेगी नज़र वफ़ा!

    आख़िर तो एक रोज़ करेगी नज़र वफ़ा, वो यार-ए-ख़ुश-ख़िसाल सर-ए-बाम ही तो है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 7th Dec 2022

    ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है!

    दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है, लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 7th Dec 2022

    ये हर्फ़ तिरा नाम ही तो है!

    दिल मुद्दई के हर्फ़-ए-मलामत से शाद है, ऐ जान-ए-जाँ ये हर्फ़ तिरा नाम ही तो है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 7th Dec 2022

    तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है!

    हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है, दुश्नाम तो नहीं है ये इकराम ही तो है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 7th Dec 2022

    आए जो अज़ाब आए!

    आए कुछ अब्र कुछ शराब आए, इसके बा’द आए जो अज़ाब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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