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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Jul 2022

    सितारों तुम तो सो जाओ!

    परेशाँ रात सारी है सितारों तुम तो सो जाओ,सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Jul 2022

    उस दिन!

    हिन्दी फिल्म जगत में मेरे जो प्रिय गीतकार रहे हैं उनमें शैलेन्द्र जी का प्रमुख स्थान है, मैंने शैलेन्द्र जी की कई फिल्मी और गैर फिल्मी रचनाएं पहले भी शेयर की हैं, मैं उनको हिन्दी फिल्मों का जनकवि भी कहता हूँ| शैलेन्द्र जी का मेरे प्रिय नायक, निर्माता-निर्देशक राजकपूर जी के साथ भी अटूट संबंध…

  • 9th Jul 2022

    अपनी ही किसी बात पे रोना आया!

    कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त, सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया| साहिर लुधियानवी

  • 9th Jul 2022

    आज ये किस बात पे रोना आया!

    हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको, क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया| साहिर लुधियानवी

  • 9th Jul 2022

    हर इक बात पे रोना आया!

    कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया, बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया| साहिर लुधियानवी

  • 9th Jul 2022

    तुझसे मिल कर उदास रहता हूँ!

    चंद कलियाँ निशात की चुनकर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ,तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझसे मिल कर उदास रहता हूँ| साहिर लुधियानवी

  • 9th Jul 2022

    सदियों तक यह खेल रचाना है!

    हम लोग खिलौना हैं एक ऎसे खिलाड़ी का,जिसको अभी सदियों तक यह खेल रचाना है| साहिर लुधियानवी

  • 9th Jul 2022

    हर मोड़ बहाना है!

    क्या जाने कोई किस पर, किस मोड़ पर क्या बीते,इस राह में ऎ राही हर मोड़ बहाना है| साहिर लुधियानवी

  • 9th Jul 2022

    पलक झपकने तक खेल सुहाना है!

    एक पल की पलक पर है, ठहरी हुई यह दुनिया,एक पलक झपकने तक हर खेल सुहाना है| साहिर लुधियानवी

  • 9th Jul 2022

    कोई राही समझा है, न जाना है!

    यह राह कहाँ से है यह राह कहाँ तक है,यह राज़ कोई राही समझा है, न जाना है| साहिर लुधियानवी

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